Zara Hatke: धरती पर कई हैरान करने वाली जगहे हैं। कुछ जगहों पर लाल रंग की मिट्टी वाली भूरी जमीन, काले रंग के ज्वालामुखी के लावे से बना बालू और गहरी सूखी घाटियां हैं। हम आपको अपनी खबर में धरती पर स्थित कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में बताएंगे, जो मंगल ग्रह की तरह हैं। उत्तरी आइसलैंड भी एक ऐसी जगह, जहां आपको लगेगा कि आप धरती के बजाय मंगल ग्रह पर हैं। आइए जानते हैं उनको जगहों के बारे में, जबां पर मंगल ग्रह जैसे हालात हैं।
Zara Hatke: धरती की इन जगहों पर है मंगल ग्रह की तरह हालात, एक जगह तो 10 लाख साल से नहीं हुई बारिश
Zara Hatke: कुछ जगहों पर लाल रंग की मिट्टी वाली भूरी जमीन, काले रंग के ज्वालामुखी के लावे से बना बालू और गहरी सूखी घाटियां हैं। हम आपको अपनी खबर में धरती पर स्थित कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में बताएंगे, जो मंगल ग्रह की तरह हैं।
मैक्मर्डो ड्राय वैली, अंटार्कटिका
अंटार्कटिका का नाम लेते ही समंदर में तैरते बर्फीले पहाड़ों का ख्याल आता है, लेकिन मैक्मर्डो ड्राय वैली बर्फ से मुक्त इलाका है। यहां औसत तापमान माइनस 15 डिग्री सेल्सियस से माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां 10 लाख साल से बारिश नहीं हुई है। कुछ जगह पर बर्फ की बारिश जरूर होती है। चूंकि बारिश इतनी कम होती है और ठंड भयंकर है, इसलिए जो भी बर्फ यहां गिरती है वो तुरंत गैस बन जाती है।
ऐसे ही हालात मंगल ग्रह पर भी होते हैं। अंटार्कटिका की मैक्मर्डो ड्राय वैली तूफानी हवाओं का भी हमला झेलती है। इनकी औसत रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक होती है। मंगल ग्रह पर इतनी तेज आंधी तो नहीं चलती, लेकिन जब भी वहां आंधी आती है, तो धुएं का गुबार उठता है, क्योंकि मिट्टी हल्की है। ऐसे ही एक तूफान की वजह से नासा का अपॉर्च्यूनिटी रोवर खराब हो गया था। इतने मुश्किल हालात में भी मैक्मर्डो ड्राय वैली में कुछ कीटाणु आबाद हैं।
हैंक्सविल, यूटा, अमेरिका
दक्षिणी पश्चिमी अमेरिका के कोलोराडो के पठारी इलाके में संतरी रंग की चट्टानों वाला ये इलाका मंगल ग्रह से बहुत मिलता है। यहां की कुछ चट्टानें तो जुरासिक युग की हैं। अमेरिका के यूटा सूबे में पड़ने वाला हैंक्सविल इलाका अंतरिक्ष से जुड़े प्रयोगों के लिए काम आता है। हाल ही में कनाडा और ब्रिटेन के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने यहां पर मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले रोवर को टेस्ट किया था।
कैनेरी आइलैंड्स, तेनरीफ
स्पेन के मशहूर कैनेरी आइलैंड्स का निर्माण तीस लाख साल पहले एक ज्वालामुखी विस्फोट से हुआ था। यह आज दुनिया के बहुत लोकप्रिय टूरिस्ट ठिकानों में से एक है, लेकिन यहां आप मंगल ग्रह के धरातल जैसा माहौल भी देख सकते हैं। द्वीप के ठीक बीच में स्थित है वो ज्वालामुखी जिसमें विस्फोट से ये द्वीप बना था। इसकी ऊंचाई 3718 मीटर है। ज्वालामुखी के आस-पास लावे से बनी गुफाएं हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसी ही गुफाएं मंगल ग्रह पर भी होंगी। मंगल पर मौजूद ऐसी गुफाओं में पानी भी हो सकता है।
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आइसलैंड
उत्तरी ध्रुव के करीब स्थित ये जगह मंगल ग्रह से बहुत मिलती जुलती है। ये आज के मंगल ग्रह के साथ-साथ अरबों साल पहले वहां के हालात का अंदाजा भी कराती है। ज्वालमुखी के लावे से बनी गहरे रंग की मिट्टी में पानी का कतरा पाना भी मुश्किल है। इसीलिए, यहां कुछ भी नहीं उगता। यहां की चट्टानों की बनावट काफी हद तक मंगल ग्रह की चट्टानों से मिलती है। इसीलिए यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने आइसलैंड में अपने मार्स रोवर का परीक्षण भी किया था। आइसलैंड से वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर अरबों साल पहले के हालात का भी अंदाजा होता है। यहां सक्रिय गर्म पानी के सोते कुदरती प्रयोगशाला का काम करते हैं। ये वैसा ही माहौल देते हैं, जैसे माहौल का अंदाजा वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर होने का लगाते हैं।
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