अगर आपने इतिहास पढ़ा होगा तो ये बखूबी जानते होंगे कि पहले भारत की राजधानी कलकत्ता (अब कोलकाता) हुआ करती है। बाद में 13 फरवरी, 1931 को दिल्ली को आधिकारिक तौर पर राजधानी घोषित कर दिया गया। ऐसा इसलिए क्योंकि भौगोलिक दृष्टि से दिल्ली देश के मध्य में स्थित था। तब से लेकर अब तक भारत की राजधानी दिल्ली ही है। आपको बता दें कि मुस्लिम देश इंडोनेशिया भी कुछ इसी राह पर चल निकला है। हालांकि यहां मामला कुछ अलग है।
ये पांच देश बदल चुके हैं अपनी राजधानी, कहीं भूकंप का था खतरा तो कहीं थी भीड़
कजाखस्तान
1991 में कजाखस्तान जब सोवियत संघ से आजाद हुआ, तो इसकी राजधानी अलमाती शहर था, लेकिन इस शहर के साथ कई समस्याएं थीं। एक तो यह कि इस शहर का विस्तार नहीं किया जा सकता था और दूसरा ये कि यह भूकंप के लिए संवेदनशील इलाका था और चीन की सीमा के बेहद करीब भी था। बाद में सरकार ने 1997 में अस्ताना (पहले अकमोला) को देश की नई राजधानी बना दिया और इसका नया नाम नूर सुल्तान रख दिया गया।
नाइजीरिया
1914 में लागोस नाइजीरिया की राजधानी बना था। एक अक्टूबर, 1960 को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद तक यह शहर देश की राजधानी बना रहा। बाद में साल 1976 में नाइजीरिया के राष्ट्राध्यक्ष जनरल मुर्तला मोहम्मद ने घोषणा की कि अबुजा को राजधानी के रूप में विकसित किया जाएगा। 12 दिसंबर, 1991 को आधिकारिक तौर पर अबुजा को नाइजीरिया की राजधानी घोषित कर दिया गया।
म्यांमार
पहले बर्मा नाम से जाने जाने वाले म्यांमार की राजधानी फिलहाल नैप्यीदा है। इससे पहले साल 1948 से लेकर छह नवंबर, 2005 तक यांगून (रंगून) देश की राजधानी हुआ करता था, लेकिन बाद में देश के सैन्य शासकों ने इसकी राजधानी बदल कर नैप्यीदा कर दी। हालांकि इसके पीछे का कारण नहीं बताया गया।
बोलीविया
यूं तो संवैधानिक तौर पर बोलीविया की राजधानी सुक्रे है, लेकिन सरकारी परिसर ला पाज में स्थित है। वर्ष 1899 तक संसद से लेकर सबकुछ सुक्रे में ही था, लेकिन गृहयुद्ध के बाद सभी तरह के सरकारी दफ्तरों को ला पाज में स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि देश की न्यायपालिका अभी भी सुक्रे में ही है।