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Eton of the East: भारत का वो रॉयल स्कूल जहां 300 नौकरों के साथ पहुंचा था पहला छात्र, इस राज्य में है स्थित

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: Jyoti Mehra Updated Sat, 23 May 2026 02:44 PM IST
सार

Most Royal School In India: भारत की शिक्षा प्रणाली में कुछ ऐसे संस्थान भी शामिल हैं, जहां पढ़ाई के साथ-साथ रॉयल अंदाज की झलक भी मिलती है। जो सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि अपने भीतर इतिहास, शान और विरासत की एक अलग दुनिया समेटे हुए हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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Indias only school where princes studied first student arrived with 300 servants Most Royal School In India
भारत का सबसे रॉयल स्कूल - फोटो : AI

Most Royal School In India: भारत की शिक्षा प्रणाली में कुछ ऐसे संस्थान भी शामिल हैं, जो सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि अपने भीतर इतिहास, शान और विरासत की एक अलग दुनिया समेटे हुए हैं। ये वो जगहें हैं, जहां पढ़ाई के साथ-साथ रॉयल अंदाज की झलक भी मिलती है। ऐसा ही एक नाम है राजस्थान के अजमेर में स्थित मेयो कॉलेज, जिसे देश के सबसे प्रतिष्ठित बोर्डिंग स्कूलों में गिना जाता है। इसकी भव्यता और शिक्षा पद्धति के कारण इसे ‘ईटन ऑफ द ईस्ट’ कहा जाता है, क्योंकि इसकी संरचना इंग्लैंड के मशहूर ईटन कॉलेज से प्रेरित है। खास बात यह है कि इसकी स्थापना मूल रूप से राजघरानों के राजकुमारों को आधुनिक शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी।

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क्यों खास है ये स्कूल? - फोटो : mayocollege.com

क्यों खास है ये स्कूल?
मेयो कॉलेज अपनी शानदार वास्तुकला, विशाल परिसर और अनुशासनपूर्ण माहौल के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। इसकी नींव ब्रिटिश काल में रखी गई थी। इतिहास के अनुसार, साल 1875 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड मेयो ने इसकी स्थापना की शुरुआत की थी, हालांकि इसकी योजना इससे पहले ही बन चुकी थी। उस समय इसका मकसद भारतीय रियासतों के युवराजों को ऐसी शिक्षा देना था, जिससे वे आगे चलकर अपने राज्यों का कुशल नेतृत्व कर सकें।

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पहले छात्र की कहानी - फोटो : mayocollege.com

पहले छात्र की कहानी
इस संस्थान से जुड़ा एक किस्सा आज भी लोगों को चौंका देता है। कहा जाता है कि मेयो कॉलेज में प्रवेश लेने वाले पहले छात्र अलवर रियासत के राजकुमार मंगल सिंह थे। जब वे यहां पढ़ने पहुंचे, तो अकेले नहीं आए, बल्कि उनके साथ करीब 300 सेवकों और सहायकों का पूरा जत्था भी था। यह घटना उस दौर की शाही जीवनशैली और रईसी का जीवंत उदाहरण मानी जाती है, और आज भी कॉलेज के इतिहास की सबसे चर्चित कहानियों में शामिल है।

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शिक्षा के साथ इन चीजों पर भी दिया जाता है ध्यान - फोटो : mayocollege.com

शिक्षा के साथ इन चीजों पर भी दिया जाता है ध्यान
मेयो कॉलेज केवल शिक्षा का केंद्र नहीं है, बल्कि यह छात्रों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान देता है। यहां खेल, कला, संगीत और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बराबर महत्व दिया जाता है। इस संस्थान से पढ़े कई छात्र आगे चलकर सेना, राजनीति, प्रशासन और मनोरंजन जगत में बड़ी पहचान बना चुके हैं। बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय भी इसी प्रतिष्ठित स्कूल के पूर्व छात्र रहे हैं।

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शाही शिक्षा परंपरा का प्रतीक  - फोटो : mayocollege.com

शाही शिक्षा परंपरा का प्रतीक 
आज के समय में मेयो कॉलेज भारत के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित रेसिडेंशियल स्कूलों में गिना जाता है। यहां की वार्षिक फीस लाखों रुपये में होती है और एडमिशन प्रक्रिया भी काफी प्रतिस्पर्धी मानी जाती है। इसके बावजूद देशभर के कई परिवार अपने बच्चों को यहां पढ़ाने का सपना देखते हैं। मेयो कॉलेज आज सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की शाही शिक्षा परंपरा और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक बन चुका है।

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