Interesting Facts About Zebra: दूर से देखने पर काले-सफेद धारियों में सजा जेब्रा किसी पेंटिंग जैसा खूबसूरत लगता है, मासूम आंखें और शांत सा अंदाज। लेकिन जैसे ही आप इसकी असल दुनिया को करीब से समझते हैं, तो तस्वीर बदल जाती है। यह दिखने में भले ही सौम्य लगे, पर स्वभाव से यह अफ्रीका के सबसे जिद्दी और खतरनाक जानवरों में गिना जाता है।
जेब्रा की ताकत और तेवर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शेर और चीता जैसे शिकारी भी इसे आसानी से निशाना नहीं बनाते। अफ्रीकी सवाना और घास के मैदानों में रहने वाले इस जानवर की तीन प्रमुख प्रजातियां होती हैं, प्लेन्स, माउंटेन और ग्रेवी जेब्रा। इनमें प्लेन्स जेब्रा सबसे ज्यादा देखा जाता है। इंसानों ने जहां घोड़े को हजारों साल पहले पालतू बना लिया, वहीं जेब्रा को काबू में करने की हर कोशिश नाकाम रही। इसकी वजह है इसका बेकाबू, स्वतंत्र और आक्रामक स्वभाव।
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रफ्तार जानकर होगी हैरानी
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रफ्तार जानकर होगी हैरानी
जेब्रा सिर्फ खूबसूरत नहीं, बल्कि बेहद जुझारू भी होता है। अगर कोई शिकारी इस पर हमला करता है, तो यह अपनी ताकतवर लात से पलटवार करता है। इसकी किक इतनी जबरदस्त होती है कि शेर जैसे जानवर को गंभीर चोट पहुंच सकती है। कई बार शिकारी खुद घायल होकर पीछे हट जाते हैं। यही नहीं 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाला यह जानवर किसी के लिए भी आसान शिकार नहीं है।
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धारियां बनती हैं इनकी सुरक्षा
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धारियां बनती हैं इनकी सुरक्षा
इनके शरीर पर बनी धारियां भी सिर्फ सजावट नहीं हैं। हर जेब्रा का पैटर्न अलग होता है, ठीक वैसे ही जैसे इंसानों के फिंगरप्रिंट। ये धारियां शिकारियों को भ्रमित करने का काम करती हैं। जब पूरा झुंड एक साथ दौड़ता है, तो यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा जानवर कहां है और यही भ्रम उनकी रक्षा बन जाता है।
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सबसे अलग स्वभाव
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सबसे अलग स्वभाव
जेब्रा का स्वभाव उसे सबसे अलग बनाता है। इसे बांधने या नियंत्रित करने की कोशिश की जाए, तो यह जोरदार विरोध करता है। कई बार यह इंसानों पर भी हमला कर चुका है। अफ्रीका में इसे आजाद रूह वाला जानवर माना जाता है, एक ऐसा जीव जो किसी के अधीन रहना पसंद नहीं करता। भले ही कुछ जगहों पर इसे घोड़े के साथ क्रॉस करने की कोशिश हुई, लेकिन इसे पूरी तरह पालतू बनाना आज तक संभव नहीं हो पाया।
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सबसे अलग स्वभाव
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झुंड में रहना इसकी आदत है, जहां 10 से 50 सदस्य एक साथ रहते हैं। इनके बीच गहरा तालमेल होता है और खतरे के समय ये मिलकर शिकारियों का सामना करते हैं। घास, पत्तियां और छोटे पौधों पर निर्भर रहने वाला यह जानवर जरूरत पड़ने पर कई दिनों तक बिना पानी के भी रह सकता है।
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