Belgium Work Life Balance: कहते हैं घर वही होता है जहां दिल बसता है, लेकिन आज की दुनिया में दिल और दिमाग अक्सर दो अलग दिशाओं में खड़े नजर आते हैं। खासकर तब जब बात विदेश में बसे भारतीयों की होती है। आमतौर पर यह मान लिया जाता है कि बेहतर लाइफस्टाइल, साफ-सुथरा माहौल और आधुनिक सुविधाएं ही उन्हें भारत से दूर रखती हैं। लेकिन हाल ही में बेल्जियम में काम कर रहे भारतीय अलेख श्रीवास्तव के एक वायरल वीडियो ने इस सोच की परतें खोल दी हैं।
Viral Video: यहां 2-3 हफ्ते की छुट्टी पर जाना है आम, शख्स ने बताई विदेश में भारतीयों के रुकने की वजह
Belgium Work Life Balance: हाल ही में बेल्जियम में काम कर रहे एक भारतीय का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह भारत के वर्क कल्चर की तुलना बेल्जियम के वर्क कल्चर से कर रहे हैं। आइए जानते हैं उन्होंने क्या खास बात कही।
साझा किए अपने अनुभव
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सबसे बड़ा अंतर वर्क-लाइफ बैलेंस में दिखता है। यूरोप में आमतौर पर काम का समय तय होता है, शाम 5 बजे के बाद ऑफिस की जिम्मेदारियां खत्म और निजी जिंदगी शुरू। वहीं भारत में अगर कोई कर्मचारी समय पर ऑफिस छोड़ दे, तो अक्सर उसके काम को लेकर सवाल उठने लगते हैं, जैसे उसने पूरा दिन दिया ही नहीं।
छुट्टी से पहले बैकअप का दबाव
अलेख ने छुट्टियों को लेकर भी एक दिलचस्प तुलना की। उनके अनुसार यूरोप में दो से तीन हफ्तों की छुट्टी लेना एक सामान्य बात है और इससे किसी की प्रोफेशनल छवि पर असर नहीं पड़ता। लेकिन भारत में कुछ दिनों की छुट्टी लेना भी कई बार चुनौती बन जाता है। छुट्टी लेने से पहले बैकअप तैयार करने का दबाव होता है, और कई बार तो ऐसा लगता है कि इंसान खुद ही अपने काम का बैकअप बनकर रह जाता है।
वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा कि यूरोप में रहने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि असली फर्क साफ-सफाई या इंफ्रास्ट्रक्चर में नहीं, बल्कि इस बात में है कि लोग अपने समय को किस नजर से देखते हैं। वहां शाम 5 बजे का मतलब होता है, अपनी जिंदगी जीना शुरू करना। जबकि भारत में काम खत्म होने के बाद भी किसी न किसी रूप में जिम्मेदारियां साथ चलती रहती हैं।
देखें वीडियो-
संतुलित जीवन की सुविधा
अंत में उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अपनी जिंदगी के 25-30 साल भारत में बिता चुके होते हैं, वे यहां के माहौल के अभ्यस्त होते हैं। ऐसे में उनके लिए दुविधा बेहतर सुविधाओं को छोड़ने की नहीं, बल्कि उस संतुलित जीवन को पीछे छोड़ने की होती है, जो उन्हें विदेश में मिलता है। शायद यही कारण है कि दिल भारत में बसता है, लेकिन कदम लौटने से पहले ठहर जाते हैं।
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