कानपुर के कल्याणपुर थाने के पास बने आशा देवी मंदिर की अनोखी मान्यता है। यहां भक्त फल या भोग नहीं बल्कि ईंट पत्थर चढ़ाते हैं। लोगों का मानना है कि इससे माता खुश हो जाती हैं और उनकी मुरादें पूरी कर देती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने जब माता सीता का त्याग किया था, तब वह बाल्मीकि आश्रम जाने से पहले यहांं रुककर मां भगवती की प्रार्थना की थी।
सीता माता ने यहां भगवान राम के लिए आश लगाई थी। मंदिर में माता की मूर्ति नहीं बल्कि शिला रखी हुई है, जिसकी पूजा की जाती है। महिलाएं माता की पूजा में ईंट-पत्थर के साथ-साथ पूरेे श्रंगार का सामन चढ़ाती हैंं।
मंदिर की विशेषता है कि यहां श्रद्धालु खुले में पूजा करते हैंं। कई बार मंदिर में छत ढालने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार छत टूटकर गिर जाती थी। कोई भी मौसम हो भक्त यहां खुले में ही माता की पूजा करते हैं।
भक्त गीता श्रीवास्तव की मानें तो मंदिर में माता से आस लगाकर कुछ मांगने से वह एक साल के अंदर पूरी हाे जाता है। उनके अनुसार एक बार उनकी बेटी की तबियत खराब हो गई थी, डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था। इस मंदिर में आकर ईंट रख कर मन्नत मांगी और बेटी ठीक हो गई।