Lal Bahadur Shastri Death Anniversary: देश में कई नेताओं की मौत पर सवाल खड़े होते रहे हैं, लेकिन भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत के रहस्य से 56 साल बाद भी पर्दा नहीं उठ पाया है। भूतपूर्व प्रधानमंत्री की मौत 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में हुई थी। हिन्दुस्तान के लोगों में आज भी इस बात की चर्चा होती है कि आखिर उस रात ताशकंद में ऐसा क्या हुआ था कि लाल बहादुर शास्त्री की अचानक मौत हो गई थी।
Lal Bahadur Shastri Death Anniversary: ताशकंद में हुई शास्त्री जी की मौत आज भी है रहस्य, जानिए क्या हुआ था उस रात
आधिकारिक तौर पर बताया गया कि लाल बहादुर शास्त्री की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई थी। बताया जाता है कि शास्त्री को दिल से संबंधित बीमार थी और साल 1959 में एक बार हार्ट अटैक भी आया था। इसके बाद उनके परिवार के लोग उनको कम काम करने की सलाह देते थे, लेकिन प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद उनका काम और बढ़ गया।
शव का नहीं हुआ था पोस्टमार्टम
ताशकंद में मौत के बाद शास्त्री का पार्थिव शरीर भारत लाया गया था। इसके बाद कई प्रत्यक्षदर्शियों ने शास्त्री के चेहरे और शरीर पर अप्राकृतिक नीले और सफेद धब्बे देखे जाने की बात कही है। इसके अलावा उनके पेट और गर्दन पर कटे के भी निशान थे। सबसे हैरानी की बात यह है कि मौत से पर्दा उठाने के लिए बनी राजनारायण जांच समिति किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की जा सकी। संसदीय लाइब्रेरी में भी उनकी मौत या जांच समित का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
लाल बहादुर शास्त्री की संदिग्ध अवस्था में मौत होने के बावजूद भी उनके शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। शास्त्री जी के परिजनों ने दावा किया था कि उनके शरीर पर जहर की वजह से नीले निशान थे। कई और ऐसी चीजें देखने को मिलीं जिसकी वजह से उनकी मौत पर सवाल खड़ा होता है। शास्त्री की शरीर पर कटे के निशान कहां से आए जबकि उनका पोस्टमार्टम नहीं किया गया था। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2009 में भारत सरकार ने स्वीकार किया था कि शास्त्री की मौत के बाद उनके डॉक्टर और रूस डाक्टरों द्वारा जांच की गई थी।
भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री की मौत तब और रहस्यमयी बन गई जब उनके दो खास गवाहों की असामान्य मौत हो गई। नौकर रामनाथ और निजी डॉक्टर डॉ आरएन चुग को साल 1977 में संसदीय निकाय के सामने पेश होना था, क्योंकि दोनों शास्त्री के साथ ताशकंद गए थे। लेकिन दोनों की संसदीय निकाय के सामने पेश होने से पहले ही मौत हो गई।
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