Fenglin Snail Race: आज की दुनिया में जहां हर कोई घड़ी की सुइयों से आगे निकलने की दौड़ में लगा है, वहीं कुछ जगहें ऐसी भी हैं जो इस रफ्तार को चुनौती देती हैं। यहां के लोगों का मानना है कि जिंदगी सिर्फ तेज भागने का नाम नहीं, बल्कि ठहरकर उसे महसूस करने का भी हुनर है। इसी सोच को जीता है ताइवान का एक छोटा-सा शहर, जो “धीमेपन” को अपनी पहचान बना चुका है।
Snail Race: इस शहर में होती है घोंघों की रेस, धीमी जिंदगी का जश्न मनाते हैं यहां के लोग
हुलिएन काउंटी में बसा फेंगलिन शहर तेज जिंदगी के बजाय सुकून भरे जीवन को अपनाता है। यहां लोग हर पल को आराम से जीने में विश्वास रखते हैं, और यही वजह है कि यहां होने वाली अनोखी “घोंघा रेस” पूरे देश में चर्चा बटोर रही है।
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घोंघा रेस का आयोजन
साल 2024 में आए भूकंप के बाद यहां का पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हुआ। जब पर्यटकों की संख्या घटने लगी, तो स्थानीय लोगों ने अपनी इसी खास पहचान को दोबारा जीवंत करने का फैसला किया। नतीजा, पांच साल के अंतराल के बाद फिर से भव्य घोंघा रेस का आयोजन किया गया, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया।
ब्रदर स्नेल ने जीती रेस
रेस का अंदाज भी उतना ही अनोखा है जितना इसका विचार। एक गोल मेज के बीच घोंघों को रखा जाता है, और जो घोंघा सबसे पहले 33 सेंटीमीटर दूर किनारे तक पहुंचता है, वही विजेता बनता है। इस बार ‘ब्रदर स्नेल’ नाम के घोंघे ने सिर्फ 3 मिनट 3 सेकंड में यह दूरी तय कर जीत अपने नाम की।
स्नेल खाते हैं खास डाइट
दिलचस्प बात यह है कि प्रतिभागी अपने घोंघों की खास देखभाल करते हैं। उन्हें ताजे फल, सब्जियां और शकरकंद के पत्ते खिलाए जाते हैं, ताकि वे “फिट” रहें। कुछ लोग तो अपने घोंघों के साथ लंबा सफर तय कर इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचते हैं, जैसे एक कपल, जो अपने ‘जायंट अफ्रीकन स्नेल’ के साथ करीब पांच घंटे की यात्रा करके यहां आया।
हालांकि फेंगलिन की खूबसूरती सिर्फ इस रेस तक सीमित नहीं है। यहां ई-बाइक टूर, जापानी दौर की पुरानी इमारतें, ऐतिहासिक तंबाकू गोदाम और हक्का संस्कृति भी लोगों को आकर्षित करती है। हरियाली से घिरा यह शांत शहर उन लोगों के लिए किसी राहत की तरह है, जो भागदौड़ से दूर कुछ पल सुकून के तलाशते हैं।
धीमी रफ्तार की सराहना
इस अनोखे आयोजन के पीछे मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश छिपा है, हर वक्त तेज भागना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी धीमे कदमों से चलकर ही जिंदगी की असली खूबसूरती को महसूस किया जा सकता है। फेंगलिन मानो यही कहता है, रफ्तार कम करो, मुस्कुराओ और जिंदगी को उसके असली रंग में जीओ।
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