Life on Eath: धरती के लिए एस्टेरॉयड को खतरा बताया जाता है। अंतरिक्ष एजेंसियां अक्सर एस्टेरॉयड को लेकर चेतावनी जारी करती हैं। कहा जाता है कि एक बार विनाशकारी एस्टेरॉयड की धरती से टक्कर हुई थी, जिसके बाद डायनासोर खत्म हो गए थे। अब इस बीच शोधकर्ताओं ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका मानना है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत से एस्टेरॉयड का जुड़ाव हो सकता है। एक शोध के मुताबिक, डायनासोर को खत्म करने वाले एस्टेरॉयड से 200 गुना बड़े एस्टेरॉयड ने वास्तव में प्रारंभिक पृथ्वी पर जीवन को पनपने में मदद की थी।
Life on Eath: धरती पर कैसे हुई जीवन की शुरुआत? इस शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
एस्टेरॉयड का नाम S2 है, जो एक बड़ी अंतरिक्ष चट्टान है। इसका आकार माउंट एवरेस्ट से चार गुना बड़ा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका पृथ्वी पर विशेष रूप से महासागरों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा था।
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एस्टेरॉयड के टकराने से भयानक सुनामी आई
पीएनएएस में एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एस्टेरॉयड S2 के पृथ्वी से टकराने पर महासागर उबल गए और भयानक सुनामी आई। हाल ही में वैज्ञानिक दक्षिण अफ्रीका के बार्बरटन ग्रीनस्टोन बेल्ट में उल्कापिंड द्वारा निर्मित प्रभावित क्रेटर पर जांच के लिए गए थे। टीम चट्टान को जांच लिए लैब में लेकर आई थी।
वैज्ञानिकों को मिले ऐसे सबूत
चट्टान की शोध से खुलासा हुआ है कि S2 के टकराने से पैदा हुई सुनामी से जमीन से मलबा तटीय क्षेत्रों में बह गया। समुद्र की सतह की परत वाष्पित होकर वायुमंडल में उबलने लगी और वातावरण अपने आप गर्म हो गया। इससे तापमान में ज्यादा उतार-चढ़ाव आया। वैज्ञानिकों को ऐसे सबूत भी मिले हैं, जिनसे जानकारी मिलती है कि सुनामी से लौह और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व नष्ट हो गए थे।
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शोधकर्त का मानते हैं कि इस घटना ने जीवन के विकास को प्रेरित किया होगा। शोध के मुख्य लेखक हार्वर्ड विश्वविद्यालय की भूविज्ञानी नादजा ड्रेबोन हैं। उन्होंने बताया कि हम जानते हैं कि पृथ्वी के शुरुआती काल के दौरान विशाल एस्टेरॉयड के प्रभाव समय-समय पर होते थे। प्रारंभिक जीवन के विकास को एस्टेरॉयड ने प्रभावित किया होगा। हालांकि, हमें यह समझ नहीं थी कि आखिर कैसे।
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'एस्टेरॉयड से धरती पर जीवन को फलने-फूलने का मौका मिला'
ड्रेबन का कहना है कि एस्टेरॉयड की घटना को हम विनाशकारी मानते हैं, लेकिन इस शोध से पता चलता है कि इन प्रभावों से जीवन को फायदा हुआ होगा। खासतौर पर शुरुआत में इन प्रभाव के कारण ही वास्तव में जीवन को फलने-फूलने का मौका मिला होगा। यह इसलिए भी हो सकता है, क्योंकि लौह आमतौर पर उथले पानी में दुर्लभ होता है, भारी सुनामी की वजह से गहरे समुद्र से बाहर आ गया। इसके कारण तटीय क्षेत्रों में यह महत्वपूर्ण पोषक तत्व भर गया।