Mahamandleshwar: बॉलीवुड एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी हाल ही में महामंडलेश्वर बनी हैं। उन्होंने किन्नर अखाड़े में दीक्षा हासिल की। उनका अब नाम भी बदल गया है। वह श्री यमई ममता नंदगिरी कही जाएंगी। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 में ममता ने अपना पिंडदान किया। ममता का 24 जनवरी को पट्टाभिषेक किया गया था। ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर बनने पर कई साधु संत सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोई एक दिन में कैसे महामंडलेश्वर बन सकता है। आज हम आपको अपनी इस खबर में बताएंगे कि महामंडलेश्वर कैसे बनाते हैं और उनका कौन खर्च के लिए पैसे देता है।
Mahamandleshwar: अखाड़ों में कौन बन सकता है महामंडलेश्वर? जानिए कैसे चलता है इनका खर्च
Mahamandleshwar: अगर अखाड़ों में संन्यास और महामंडलेश्वर बनने के लिए कोई व्यक्ति जाता है, तो उसे अपना नाम, पता, शैक्षिक योग्यता, परिवार का ब्योरा और नौकरी-व्यवसाय के बारे में जानकारी देनी होती है।
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कैसे बनते हैं महामंडलेश्वर
अगर अखाड़ों में संन्यास और महामंडलेश्वर बनने के लिए कोई व्यक्ति जाता है, तो उसे अपना नाम, पता, शैक्षिक योग्यता, परिवार का ब्योरा और नौकरी-व्यवसाय के बारे में जानकारी देनी होती है। इसके बाद अखाड़े के थानापति उसकी जांच-पड़ताल करते हैं। थानापति के रिपोर्ट देने के बाद अखाड़े के सचिव व पंच अलग-अलग जांच करते हैं। कई तरह की जांच के बाद खरा उतरने पर किसी भी शख्स को महामंडलेश्वर की उपाधि देने का फैसला किया जाता है।
आचार्य होना जरूरी
महामंडलेश्वर का पद की बड़ी जिम्मेदारी होती है। इस पद के लिए शास्त्री, आचार्य होना जरूरी होता है। इसके अलावा वेदांग की शिक्षा होनी जरूरी होती है। अगर इस तरह की डिग्री नहीं होने पर व्यक्ति कथावाचक हो। उसके वहां मठ होना आवश्यक है। मठ में जनकल्याण के लिए सुविधाओं की जांच की जाती है। इसके बाद महामंडलेश्वर का पद दिया जाता है।
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कौन देता है महामंडलेश्वर को खर्च
हिंदू धर्म में शंकराचार्य के बाद दूसरा सबसे बड़ा पद महामंडलेश्वर का होता है। अखाड़ों में यह पद सबसे बड़ा और जिम्मेदारी वाला होता है। हालांकि, कुछ अखाड़ों में महामंडलेश्वर से बड़ा पद द्वाराचार्य या आचार्य महामंडलेश्वर का होता है।
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अखाड़ों की अर्थव्यवस्था काफी बड़ी है, जिसे चलाने के लिए अलग-अलग पद होते हैं। महामंडलेश्वर का खर्च विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त धन से चलता है। अखाड़ों के पास जमीन, मंदिर, आश्रम और दूसरी संपत्तियां होती हैं, जिनसे उन्हें आय की प्राप्ति होती है।