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क्या है LEO, ASAT और DRDO के वर्ष 2012 का दावा, अगला विश्व युद्ध अंतरिक्ष में लड़ा जाएगा!

Wed, 27 Mar 2019 06:16 PM IST
अनिल पांडेय फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Wed, 27 Mar 2019 06:16 PM IST
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mission shakti of isro pm modi anti satellite weapon power countries and india in space
सांकेतिक तस्वीर

अमेरिका, चीन और रूस के बाद अब भारत भी अंतरिक्ष की दुनिया में बड़ी महाशक्ति बन गया है। भारत ने अंतरिक्ष में इतिहास रच दिया है। दरअसल भारत ने एंटी सैटेलाइट मिसाइल (A-SAT) से अंतरिक्ष (Space) में एक सैटेलाइट को मार गिराया है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि आखिर यह ASAT मिसाइल क्या होती है और यह कैसे एक सैटेलाइट को मार गिराती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में लो अर्थ आरबिट (LEO) यानि निचली धरती की कक्षा में एंटी सैटेलाइट तकनीक में सफल होने की बात कही है। इस तकनीक में पृथ्वी से बैठकर अंतरिक्ष में घूम रही सैटेलाइट को मार गिराते हैं। ऐसी तकनीक के मामले में भारत अब चौथा देश है। माना जा रहा है कि अगला विश्व युद्ध अंतरिक्ष में लड़ा जाएगा, जिस देश के पास एंटी सैटेलाइट तकनीक होगी, वो ऐसी लड़ाई में बाजी मार ले जाएगा। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : File Photo

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन शक्ति के बारे में अपने संबोधन में बताया कि भारत ने इस मिशन के जरिए लो अर्थ ऑरबिट यानि LEO में मौजूद एक सैटेलाइट को मार गिराया है। भारत की ओर से किया गया यह मिशन सक्सेसफुल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस ऑपरेशन को सफलता पूर्वक अंजाम देने के लिए DRDO की तारीफ की है। एंटी सैटेलाइट वैपेन एक ऐसी मिसाइल होती है जिसके जरिए अंतरिक्ष में घूम रहे सैटेलाइट को निशाना बनाया जाता है। बहुत कम ही देशों के पास यह तकनीक मौजूद है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : File Photo

DRDO के पूर्व प्रमुख वीके सारस्वत ने वर्ष 2012 में ही दावा किया था कि भारत के पास दुश्मन सैटेलाइट को मार गिराने की सभी जरूरी तकनीक मौजूद हैं। दरअसल भारत के पड़ोसी चीन ने जनवरी, 2007 में इस मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसके बाद भारत सरकार ने भी इसे लेकर अपनी इच्छा का इजहार किया था। 2007 में चीन ने अपनी खराब हो चुकी फेंक युन 1-C नाम की सैटेलाइट को ASAT रॉकेट के जरिए 2,500 से 3,000 टुकड़ों में तोड़ दिया था।

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क्या होता है लो अर्थ ऑरबिट (LEO)?

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- फोटो : scienceabc.com

लो अर्थ ऑरबिट LEO (Low Earth orbit) धरती के सबसे पास वाली कक्षा होती है। यह धरती से मात्र 2000 किमी ऊपर होती है। इस कक्षा में जिन सैटेलाइट्स को स्थापित किया जाता है, उनका प्रयोग टेलीकम्युनिकेशन, नेविगेशन और यहां आदि के लिए किया जाता है। 

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क्या होती है ASAT मिसाइल?

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- फोटो : defenceupdate.in

 A-SAT काफी उन्नत तकनीक की प्रणलि है, जो अंतरिक्ष में किसी भी देश की सैन्य ताकत को दर्शाती है। ASAT मिसाइल का इस्तेमाल अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स को मारने के लिए होता है। यह एक खतरनाक हथियार है, जिसका प्रयोग युद्ध के दौरान दुश्मन देशों की सैटेलाइट्स के खिलाफ किया जा सकता है। कई देश इसका निर्माण करते हैं और भारत भी अब इसमें शामिल हो गया है। भारत ने इस ऑपरेशन को भी स्वदेशी मिसाइल से ही अंजाम दिया है। 

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