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यहां अपने आप खिसक कर दूसरी जगह चले जाते हैं पत्थर, आज तक नहीं सुलझा रहस्य
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Mon, 02 Sep 2019 06:36 PM IST
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डेथ वैली, खिसकने वाले पत्थर
- फोटो : Social media
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आज विज्ञान ने भले ही कितनी भी तरक्की कर ली हो, लेकिन दुनिया में ऐसे कई रहस्य आज भी हैं, जो अनसुलझे हैं, जिनके रहस्यों को आज तक वैज्ञानिक भी सुलझा नहीं पाए हैं। एक ऐसा ही रहस्य पूर्वी कैलिफोर्निया में स्थित एक रेगिस्तान में भी है, जिसे डेथ वैली (मौत की घाटी) के नाम से जाना जाता है।
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डेथ वैली, खिसकने वाले पत्थर
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कैलिफोर्निया के डेथ वैली की संरचना और तापमान भू-वैज्ञानिकों को हमेशा से चौंकाता रहा है, लेकिन इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली जो चीज है, वो है यहां के अपने आप खिसकने वाले पत्थर, जिन्हें सेलिंग स्टोन्स के नाम से जाना जाता है। यहां के रेस ट्रैक क्षेत्र में मौजूद 320 किलोग्राम तक के पत्थर भी अपने आप खिसक कर एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं।
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डेथ वैली, खिसकने वाले पत्थर
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डेथ वैली में पत्थरों का खुद-ब-खुद खिसकना वैज्ञानिकों के लिए भी एक पहेली बनी हुई है। रेस ट्रैक प्लाया 2.5 मील उत्तर से दक्षिण और 1.25 मील पूरब से पश्चिम तक बिल्कुल सपाट है, लेकिन यहां बिखरे पत्थर अपने आप खिसकते रहते हैं। यहां ऐसे 150 से भी अधिक पत्थर हैं। हालांकि किसी ने भी अपनी आंखों से पत्थरों को खिसकते हुए नहीं देखा है।
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डेथ वैली, खिसकने वाले पत्थर
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सर्दियों में ये पत्थर करीब 250 मीटर से ज्यादा दूर तक खिसके मिलते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1972 में इस रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई गई थी। टीम ने पत्थरों के एक ग्रुप का नामकरण कर उस पर सात साल अध्ययन किया। केरीन नाम का लगभग 317 किलोग्राम का पत्थर अध्ययन के दौरान जरा भी नहीं हिला, लेकिन जब वैज्ञानिक कुछ साल बाद वहां वापस लौटे, तो उन्होंने उस पत्थर को एक किलोमीटर दूर पाया।
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डेथ वैली, खिसकने वाले पत्थर
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कुछ वैज्ञानिकों का यह मानना है कि तेज रफ्तार से चलने वाली हवाओं के कारण पत्थर एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं। शोध बताते हैं कि रेगिस्तान में 90 मील प्रति घंटे की गति से चलने वाली हवाएं, रात को जमने वाली बर्फ और सतह के ऊपर गीली मिट्टी की पतली परत, ये सब मिलकर पत्थरों को गतिमान करते होंगे।
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