Sunita Williams: नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बैरी विल्मोर की फरवरी 2025 में पृथ्वी पर वापसी होगी। दोनों अंतरिक्ष यात्री दो महीने से ज्यादा समय से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में मौजूद हैं। बोइंग स्टारलाइनर में खराबी के कारण दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी को फरवरी 2025 तक टाल दिया गया। यह मिशन सिर्फ आठ दिन का ही था, लेकिन हीलियम लीक और थ्रस्टर में खराबी के कारण उनकी वापसी नहीं पाई। अब सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर को एलन मस्क की कंपनी SpaceX के ड्रैगन क्रू कैप्सूल से वापस लाया जाएगा। 24 सितंबर 2024 को Crew-9 मिशन को लॉन्च किया जाएगा।
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अब इस सिर्फ दो परुष अंतरिक्ष यात्री रूसी एस्ट्रोनॉट एलेक्जेंडर गोरबुनोव और पायलट निक हेग जाएंगे। दोनों महिला अंतरिक्ष यात्री जेना कार्डमैन और स्टेफनी विल्सन इस मिशन में नहीं जाएंगी, उन्हें अगले मिशन में शामिल किया गया है।
मिशन कमांडर बने निक हेग
पहले के मिशन पायलट निक हेग को कमांडर बनाया गया है, तो वहीं एलेक्जेंडर के प्रोफाइल में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। क्रू-9 मिशन के ड्रैगन कैप्सूल को अंतरिक्ष स्टेशन से डॉक करने के लिए पहले वहां जगह तैयार की जा रही है। बोईंग के खराब स्टारलाइनर को 6 सितंबर को अनडॉक किया जाएगा और वह 7 सितंबर को धरती पर लौट आएगा। इसके बाद ड्रैगन कैप्सूल उसकी जगह पर डॉक होगा।
क्या है Crew-9 स्पेस मिशन?
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के कॉमर्शियल क्रू प्रोग्राम में यह शामिल है। यह SpaceX के साथ मिलकर अंतरिक्ष स्टेशन का 9 रोटेशनल मिशन है, जिससे अंतरिक्ष स्टेशन पर लगातार शोध किया जाता रहे। दुनिया को मौसम की सही जानकारी उपलब्ध होती रहे। दो दशक से अधिक समय से अन्तरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर हर समय कोई न कोई अंतरिक्ष यात्री रहा है। इसके कारण वह कभी भी खाली नहीं रहा। इसलिए वहां लगातार अंतरिक्ष यात्री जाते रहे हैं।
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क्या है ड्रैगन कैप्सूल?
SpaceX का ड्रैगन क्रू कैप्सूल को बनने के बाद से 46 बार लॉन्च किया जा चुका है। ड्रैगन क्रू कैप्सूल 42 बार अन्तरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा कर चुका है। इसके अलावा दो दर्जन से अधिक बार रीफ्लाइट हुई है। इसमें एक बार में सात अंतरिक्ष यात्री बैठ सकते हैं। दुनिया का यह पहला निजी अंतरिक्ष यान है, जो लगातार अंतरिक्ष स्टेशन पर एस्ट्रोनॉट्स और कार्गो लेकर आता-जाता है। आमतौर पर इसमें दो से चार अंतरिक्ष यात्री बैठते हैं। आपात स्थिति में सात यात्री बैठ सकते हैं।
