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Pakistan inflation led to increase in cost of burials shrouds funerals pakistan me marna bhi mehnga
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Pakistan Inflation: पाकिस्तान में जीना मुश्किल, मरना हुआ और भी महंगा, अपनों को दफनाने के लिए लेना पड़ रहा कर्ज
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: Jyoti Mehra
Updated Fri, 15 May 2026 12:38 PM IST
सार
Pakistan Me Marna Bhi Mehnga: पाकिस्तान इस वक्त गहरे आर्थिक संकट की मार झेल रहा है। महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है और हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब सिर्फ रोजमर्रा का जीवन ही नहीं, बल्कि किसी प्रियजन को सम्मानपूर्वक दफनाना भी गरीब और मध्यम वर्ग के लिए भारी पड़ रहा है।
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इस देश में जीने से ज्यादा मरना हुआ महंगा!
- फोटो : AI
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Pakistan Grave Price 45k Rupee: दुनिया के कई हिस्सों में महंगाई इतनी ज्यादा है कि आम लोगों के लिए जीवन यापन करना काफी चुनौती भरा हो गया है। लेकिन क्या हो अगर किसी देश में जीने से ज्यादा मरना महंगा पड़ने लगे। ये देश कोई और नहीं बल्कि अपना पड़ोसी पाकिस्तान है। जी हां आपने सही सुना, पाकिस्तान में अपनों को अंतिम विदाई देना भी आम लोगों के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन चुका है।
पाकिस्तान इस वक्त गहरे आर्थिक संकट की मार झेल रहा है। महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है और हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब सिर्फ रोजमर्रा का जीवन ही नहीं, बल्कि किसी प्रियजन को सम्मानपूर्वक दफनाना भी गरीब और मध्यम वर्ग के लिए भारी पड़ रहा है। रावलपिंडी जैसे बड़े शहरों में अंतिम संस्कार का खर्च तेजी से आसमान छू रहा है। कई परिवारों को अपने ही लोगों को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है। कब्र की खुदाई से लेकर कफन और अन्य जरूरी इंतजाम तक हर कदम पर जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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कब्रिस्तानों में जगह की कमीdeath
- फोटो : adobestock
कब्रिस्तानों में जगह की कमी
एक समय था जब यहां किसी की मौत होने पर लोग बिना किसी शुल्क के कब्र खोदने में मदद करते थे। इसे नेक काम और सवाब माना जाता था। लेकिन अब बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव ने इस परंपरा को भी कमजोर कर दिया है। आज हालात ऐसे हैं कि अंतिम संस्कार से जुड़ी लगभग हर सेवा के लिए पैसे चुकाने पड़ते हैं। रावलपिंडी के कई कब्रिस्तानों में जगह की कमी भी गंभीर समस्या बन चुकी है, जहां कुछ स्थानों पर “जगह नहीं है” जैसे बोर्ड तक लगाए जा चुके हैं।
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40 से 45 हजार का खर्च
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40 से 45 हजार का खर्च
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कब्र की खुदाई, जगह का शुल्क और ईंटों की व्यवस्था मिलाकर खर्च 40 से 45 हजार पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है। इसके अलावा शव को नहलाने यानी गुस्ल के लिए अलग से फीस देनी पड़ती है। कफन की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं, जो पहले सस्ता मिलता था, अब 3 से 4 हजार रुपये तक में मिल रहा है। वहीं गुलाब जल, अगरबत्ती, कपूर और फूलों जैसे जरूरी सामान पर भी करीब 2 हजार रुपये या उससे ज्यादा खर्च हो रहा है।
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आखिरी विदाई भी बनी लग्जरी
- फोटो : adobestock
आखिरी विदाई भी बनी लग्जरी
इन बढ़ते खर्चों का सबसे ज्यादा असर गरीब तबके पर पड़ा है। मजबूरी में लोग सस्ते और कम गुणवत्ता वाले कफन खरीदने को विवश हैं। दफनाने के बाद कब्र को पक्का करवाना भी आसान नहीं रहा, साधारण ईंट-सीमेंट की कब्र बनाने में करीब 15 हजार रुपये लगते हैं, जबकि मार्बल वाली कब्र की कीमत 30 हजार रुपये से ऊपर बताई जा रही है। कुछ कब्रिस्तानों में भ्रष्टाचार की शिकायतें भी सामने आई हैं, जहां पैसों के बदले पुरानी या लावारिस कब्रों को हटाकर नई कब्रें बनाई जा रही हैं।
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सिटीजन्स एक्शन कमेटी ने जताई चिंता
- फोटो : adobestock
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