कोरोना वायरस महामारी ने पुरे देश को प्रभावित कर दिया है। इस महामारी से बचने के लिए लोगों को बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है। ऐसे में लोग अपने सभी कामों को घर से ही कर रहे हैं। वहीं छात्र इन दिनों ऑनलाइन क्लास के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ इसी तरह ऑनलाइन क्लास करने के लिए एक छात्र रोजाना पहाड़ पर चढ़कर पढ़ाई कर रहा है। गांव में नेटवर्क नहीं होने के वजह से इस छात्र को रोजाना पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता है।
नेटवर्क नहीं रहने से परेशान छात्र रोजाना पहाड़ पर चढ़कर करता है ऑनलाइन क्लास, वीरेंद्र सहवाग ने मदद के लिए बढ़ाया आगे हाथ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दरअसल, राजस्थान के रहने वाले इस छात्र का नाम हरीश है। हरीश का गांव जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। कोविड-19 के वजह से ऑनलाइन क्लासेस चल रही है, लेकिन हरीश के गांव में कोई मोबाइल का नेटवर्क नहीं आता है। ऐसे में हरीश रोजाना 2 किलोमीटर दूर पहाड़ों पर चढ़कर सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक 40 से 45 डिग्री के तापमान पर ऑनलाइन पढ़ाई करता है।
इतनी परेशानियों का सामना करने के बाद भी हरीश का मनोबल अभी भी बहुत ऊंचा है। पढ़ाई के प्रति हरीश के लग्न और मेहनत को देखते हुए मशहूर क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग मदद के लिए आगे आए हैं। इसकी जानकारी वीरेंद्र सहवाग ने खुद अपने ट्वीटर हैंडल के माध्यम से दी है।
Ayoung boy called Harish from Barmer in Rajasthan climbs a mountain every day in order to get internet access so that he can attend online classes. He climbs at 8 am and returns home at 2pm after the class ends. Admire his dedication and would want to help him. pic.twitter.com/iZ8WlBBgSP
हरीश बाड़मेर के पचपदरा स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा सातवीं का विद्यार्थी है। कोविड-19 के वजह से इन दिनों ऑनलाइन क्लास चल रहे हैं, लेकिन हरीश के गांव में मोबाइल में नेटवर्क ही नहीं रहता है। हालांकि, हरीश ने यह तय किया कि वो किसी भी तरह ऑनलाइन क्लास जरूर अटेंड करेगा। इसके लिए वो रोजाना पहाड़ों पर चढ़कर पढ़ाई करता है।
हरीश के पिता वीरमदेव बताते हैं कि आज भी ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या है, जिसके वजह से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। सरकार को नेटवर्क ठीक करा देना चाहिए ताकि कोरोना काल में ग्रामीण इलाकों के बच्चें शिक्षा से वंचित न हो सकें।