बीसवीं सदी के वामपंथी क्रांतिकारी एर्नेस्टो चे ग्वेरा का जन्मस्थान अर्जेंटीना के रोजारियो शहर में बिकने जा रहा है। शहर के केंद्र में स्थित 2580 स्क्वॉयर फुट के इस घर के मौजूदा मालिक फ्रांसिस्को फर्रुग्गिया ने बताया कि उन्होंने इसे साल 2002 में खरीदा था।
आखिर कौन थे चे ग्वेरा, जिनके जन्मस्थान के बिकने की चर्चा दुनियाभर में हो रही है
क्यूबा की क्रांति
यहां आने वाले नामचीन लोगों में उरुग्वे के पूर्व राष्ट्रपति जोसे पेपे मुजिसा और क्यूबा के क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो के बच्चे शामिल रहे हैं, लेकिन शायद यहां आने वाले लोगों में सबसे मशहूर नाम एल्बर्टो ग्रानाडोस का है, जिन्होंने पचास के दशक में चे ग्वेरा के साथ दक्षिण अमेरिका की मोटरसाइकिल से यात्रा की थी। पेशे से डॉक्टर एल्बर्टो तब नौजवान थे और चे ग्वेरा के साथी भी।
चे ग्वेरा का जन्म साल 1928 में एक खाते-पीते मध्य वर्गीय परिवार में हुआ था, लेकिन जब उन्होंने दक्षिण अमेरिका में गरीबी और भूख देखी तो उन्होंने क्रांति का रास्ता अपना लिया। क्यूबा की क्रांति के दौरान उन्होंने अहम भूमिका निभाई। इस क्रांति में फुल्गेन्सिको बतिस्ता की तानाशाही का तख्तापलट कर दिया गया था।
इसके बाद चे ग्वेरा ने क्रांति का दायरा पूरे दक्षिण अमेरिका और विकासशील देशों तक ले जाने की इच्छा जताई। चे ग्वेरा क्यूबा से बोलिविया चले गए, जहां उन्होंने राष्ट्रपति रेने बैरिएंटोस ओर्टुनो के खिलाफ जंग लड़ रहे विद्रोही बलों की अगुवाई की।
चे ग्वेरा की हत्या
अमेरिका की मदद से बोलिविया की सेना ने चे ग्वेरा और बचे हुए लड़ाकों को पकड़ लिया। नौ अक्तूबर, 1967 को ला हिग्वेरा नाम के एक गांव में चे ग्वेरा की हत्या कर दी गई और उनका पार्थिव शरीर किसी खुफिया जगह पर दफना दिया गया। साल 1997 में उस गुप्त जगह की जानकारी मिली, जिसके बाद उनके अंतिम अवशेषों को क्यूबा लाया गया और उनकी फिर से अंत्येष्टि की गई।
क्रांतिकारी चे ग्वेरा ने अपने जीवनकाल में जो कुछ भी किया, उसको लेकर आज भी लोगों की राय बंटी हुई है। उनके समर्थक उन्हें समर्पण और आत्म-बलिदान के उदाहरण के तौर पर देखते हैं जबकि उनके आलोचकों का कहना है कि चे ग्वेरा एक क्रूर और बर्बर शख्स थे।