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Russian Sleep Experiment Know shocking story jaane russia ka khatarnak manviya prayog details in Hindi
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Experiment: क्या रूस में किया गया था ये खतरनाक प्रयोग? अपना मांस खाने लगे थे कैदी और फिर...
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Sat, 22 Mar 2025 08:02 PM IST
सार
Russian Sleep Experiment: इस एक्सपेरिमेंट को 'रशियन स्लीप एक्सपेरिमेंट' के नाम से जाना जाता है। इस एक्सपेरिमेंट के लिए जेल में बंद पांच कैदियों के साथ एक डील की गई और उनको बताया गया कि अगर वो इसका हिस्सा बनते हैं तो एक्सपेरिमेंट खत्म होने के तुरंत बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा।
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क्या रूस में किया गया था ये खतरनाक प्रयोग?
- फोटो : Adobe Stock
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Russian Sleep Experiment: दुनियाभर में कई एक्सपेरिमेंट यानी प्रयोग किए जाते हैं। इनमें कुछ के बारे में लोगों को जानकारी होती है, तो वहीं कई गुप्त तरीके से किए जाते हैं। कहा जाता है कि एक ऐसा प्रयोग 1940 के दशक में किया था। इसके बारे में लोग भयभीत हो जाते हैं। इस एक्सपेरिमेंट को 'रशियन स्लीप एक्सपेरिमेंट' के नाम से जाना जाता है। इस एक्सपेरिमेंट के लिए जेल में बंद पांच कैदियों के साथ एक डील की गई और उनको बताया गया कि अगर वो इसका हिस्सा बनते हैं तो एक्सपेरिमेंट खत्म होने के तुरंत बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा।
बताया गया कि इसके लिए 30 दिन तक उन्हें बिना सोए रहना होगा, जिसके लिए कैदी राजी हो गए। इसके बाद उन्हें एक एयर टाइट चैंबर में बंद कर दिया गया और उसमें एक गैस डाल दी गई, जिससे कैदियों को नींद न आए और वैज्ञानिक यह देख सकें कि इसका उनपर क्या प्रभाव पड़ता है।
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इस खतरनाक की वजह से अपना मांस खाने लगे थे कैदी
- फोटो : Adobe Stock
शुरुआत में तो सबकुछ सही था। सारे कैदी आराम से एक दूसरे से बातें करते रहते थे। उनकी बातों को वैज्ञानिक रिकॉर्ड भी करते रहते थे और साथ ही एक कांच के जरिए उनपर नजर भी रख रहे थे। करीब एक हफ्ते तक तो सारे कैदियों की हालत ठीक थी, लेकिन उसके बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी।
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क्या था रशियन स्लीप एक्सपेरिमेंट?
- फोटो : Adobe Stock
कैदियों ने धीरे-धीरे एक दूसरे से बात करना बंद कर दिया। वो बैठे-बैठे अपने आप ही कुछ-कुछ बोलते रहते थे। ऐसे ही 10 दिन बीत गए। फिर जैसे ही 11वां दिन आया, एक कैदी अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगा। वह इतनी तेज-तेज चिल्ला रहा था कि उसकी वोकल कॉर्ड फट गई थी। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि उसके चिल्लाने का बाकी कैदियों पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा।
क्यों किया गया था रशियन स्लीप एक्सपेरिमेंट?
- फोटो : Adobe Stock
कैदियों की हालत देखकर वैज्ञानिकों ने इस एक्सपेरिमेंट को रोकने का फैसला किया। उन्होंने 15वें दिन कैदियों वाले चैंबर में वो गैस नहीं डाली, जिसकी मदद से कैदियों को सोने से रोका जाता था। लेकिन इसका उल्टा ही प्रभाव पड़ा। सारे कैदी अचानक से चिल्लाने लगे और कहने लगे कि हमें बाहर मत निकालो, हम बाहर नहीं आना चाहते। इस बीच चैंबर में ही एक कैदी की मौत भी हो गई।
रशियन स्लीप एक्सपेरिमेंट की क्या है सच्चाई?
- फोटो : Adobe Stock
जब एक्सपेरिमेंट कर रहे वैज्ञानिकों ने कैदियों की हालत को देखा तो उनके होश ही उड़ गए। उन्होंने देखा कि कैदियों के कई अंगों से मांस गायब हो गए थे, सिर्फ उनकी हड्डियां ही दिख रही थीं। उन्हें देखने पर ऐसा लग रहा था जैसे वो एक दूसरे का या अपना ही मांस खाने लगे थे।
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