Science News: अंतरिक्ष के रहस्यों को जानने के लिए वैज्ञानिक सालों से शोध कर रहे हैं। इस दौरान वैज्ञानिक कई चौंकाने वाला खुलासा करते हैं। अब खगोलविदों ने बताया है कि धरती के पास का एक एस्टेरॉयड चांद का एक टूटा हुआ टुकड़ा है। उनको इस बात का सबूत मिला है। इस एस्टेरॉयड का नाम कामोओलेवा, जिसका अर्थ चलता हुआ टुकड़ा है। यह चट्टान का टुकड़ा एक पहिए के आकार का है। यह एस्टेरॉयड अप्रैल के महीने में धरती से 14.4 मिलियन किलोमीटर के अंदर परिक्रमा करता है।
Science News: धरती के पास घूम रहा चांद से टूटा टुकड़ा? वैज्ञानिकों ने नए अध्ययन में किया चौंकाने वाला खुलासा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इससे सौर मंडल के चारों तरफ अधिक चंद्रमा जैसे टुकड़े तैर सकते हैं। इस अध्ययन को एरिजोना विश्वविद्यालय के प्लेनेट्री वैज्ञानिक रेनू मल्होत्रा ने लिखी है। रेनू मल्होत्रा ने कहा कि अब यह स्थापित कर रहे हैं कि चंद्रमा ही कामोओलेवा का अधिक संभावित स्रोत है।
अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा
रेनू मल्होत्रा ने बताया कि दो असामान्य ऑर्बिटल प्रोपर्टीज को देखने के बाद कामोओलेवा की जांच करने के लिए खगोलविद आकर्षित हुए। पहली बात यह है कि अर्ध-उपग्रह के रूप में यह धरती के इतने करीब मौजूद है कि इसकी परिक्रमा करता प्रतीत होता है। हालांकि इसका असली ऑर्बिटल पार्टनर सूर्य है। दूसरी बात यह है कि इस एस्टेरॉयड के लाखों साल तक धरती के करीब चिपके रहने की संभावना है, तो वहीं धरती के निकट की कई वस्तुएं सिर्फ दशकों तक ही पास रहती हैं।
Chandra Grahan 2023: कब होता है चंद्र ग्रहण? सूर्य ग्रहण से कितना है अलग, जानिए क्या कहता है विज्ञान
साल 2021 में खगोलविदों ने एस्टेरॉयड के स्पेक्ट्रा का विश्लेषण किया, तो पाया कि एस्टेरॉयड का निर्माण संभवत चंद्रमा की चट्टान से हुआ था। अध्ययन में मल्होत्रा को पता चला कि कामोओलेवा के स्पेक्ट्रम को सिर्फ इसलिए देखा, क्योंकि यह एक असामान्य कक्षा में था।
Chandra Grahan 2023: भारत में कहां-कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण, आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा, जानिए सबकुछ
यह एस्टेरॉयड धरती के पास था, जिसकी वजह से खगोलविदों ने इसके स्पेक्ट्रम को खोजने के बारे में सोचा। इसके साथ ही हमें कामों के बारे में नहीं पता चलता। शोधकर्ताओं ने बताया कि उनके निष्कर्ष से उन्हें धरती के निकट खतरनाक एस्टेरॉयड की बेहतर समझ मिल सकती है। उनका अगला कदम उन स्थितियों के बारे में जावकारी हासिल करना होगा, जो चट्टान को उसकी कक्षा में धकेल सकती हैं और यह पता लगाना होगा कि वास्तव में प्रभाव कब हुआ था।