Andrei Chikatilo: अपराध के कई चेहरे होते हैं, लेकिन जिस अपराध में इंसानियत को तार-तार कर दिया जाता है उसे सबसे घिनौना माना जाता है। आज हम आपको एक ऐसे ही दरिंदे की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने 56 औरतों और बच्चियों के साथ बलात्कार कर उन्हें मौत की नींद सुला दिया। उसे रॉस्तोव का कसाई, जंगली कातिल, रेड रिपर और रॉस्तोव रिपर के नाम से भी जाना गया।
अजब-गजब: रॉत्सोव के कसाई आंद्रे चिकातिलो ने लिखी रूस में दरिंदगी की ऐसी दास्तान, जानकर कांप जाएगी रूह
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वहीं 22 सितंबर 1978 रूस के रॉस्तोव शहर की नदी से पुलिस को येलेना जकोतनोवा नाम की एक नौ साल की बच्ची की लाश मिलती है। बच्ची की गला दबाकर हत्या की गई थी और बाद में उसे चाकू से गोदा गया था। उसके साथ कुकर्म भी किया गया था। पुलिस येलेना की हत्या की तफ्तीश शुरू करती है। उस नदी के पास से बच्ची का स्कूल बैग बरामद करती है। नदी के पास बने एक सुनसान घर में जब पुलिस दाखिल होती है तो उसे वहां खून के धब्बे मिलते हैं। पुलिस जब आसपास के लोगों से बातचीत करती है तो एक शख्स बताता है कि उसने बच्ची को एक शख्स के साथ बस स्टॉप के पास जाते देखा था। पुलिस शक के बिना पर एक मजदूर को गिरफ्तार करती है, लेकिन जांच में पता चलता है कि पकड़ा गया मजदूर बेकसूर है।
कातिल रनवे और रेलवे स्टेशन पर बेघर बच्चों और औरतों के लगातार निशाना बना रहा था। मॉस्को पुलिस पर लोगों का दबाव बढ़ता जा रहा था। 1985 के अंत में इन हत्याओं की जांच के लिए इसा कोस्टॉयव को नियुक्त किया जाता है। मामलों की फिर से जांच शुरू की गई और पहले के संदिग्धों और गवाहों से फिर से पूछताछ की गई।
इसा कोस्टॉयव एक प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ एलेक्ज़ेंडर बुखानोवस्की की मदद लेते हैं। बुखानोवस्की अज्ञात हत्यारे का एक पच्चीस पन्नों का मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल तैयार करते हैं जो सोवियत रूस में इस तरह का पहला प्रोफाइल था। प्रोफाइल में बताए गए प्रमुख लक्षणों में से एक यह था कि हत्यारा नपुंसकता से पीड़ित हो सकता है और केवल हत्या करके उत्तेजना प्राप्त करना उसका मकसद है।
पुलिस कातिल की तलाश में थी, वो लगातार जुर्म को अंजाम देता जा रहा था। 1990 की शुरुआत में पुलिस अपने जासूस शहर के कोने-कोने और रेलवे स्टेशन के आसपास लगा देती है। ऐसे में एक दिन पुलिस को रेलवे स्टेशन के पास एक ऐसा शख्स दिखता है, जो पास के कुएं से अपने खून से सने हाथ धो रहा होता है। उसके चेहरे पर घाव भी होता है। एक पुलिस अधिकारी इस शख्स के पास जाकर बातचीत करता है, तो पता चलता है कि उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं।

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