अजब-गजब: इस ग्रह पर पानी की जगह पत्थरों की होती है बारिश, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह
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वैज्ञानिकों ने दो स्टडी में इन दो रहस्यमयी ग्रहों के बारे में विस्तार से बताया है। अब इससे वैज्ञानिक हमारी आकाशगंगा में फैली विविधता, जटिलता और अनोखे रहस्यों के बारे में पता कर सकते हैं। बाह्यग्रहों से ब्रह्माण्ड में ग्रहों के तंत्र में विकसित होने की विविधता के बारे में जानकारी मिल रही है।
रात में आते हैं तूफान
नेचर जर्नल में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप के माध्यम से धरती से 1300 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद WASP-178b को देखा है। इसको जहां पर देखा गया है वहां के वायुमंडल में सिलिकॉन मोनोऑक्साइड गैस भरी पड़ी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस ग्रह पर दिन में बादल नहीं होते, लेकिन रात में दो हजार मील प्रति घंटे की रफ्तार तूफानी हवाएं चलती हैं।
क्यों होती है पत्थरों की बारिश
इस रिसर्च में बताया गया है कि ये ग्रह अपने तारे के बेहद नजदीक मौजूद है। इस ग्रह का एक हिस्सा अपने तारे की तरफ हमेशा रहता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ग्रह के दूसरी ओर सिलिकॉन मोनऑक्साइड का इतनी ठंडी हो जाती है जिसकी वजह से बादल से पानी की जगह पत्थरों की बारिश हो। सुबह और शाम ग्रह इतना ज्यादा गर्म होता है कि पत्थर को भी भाप बना देता है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि पहली बार सिलिकॉन मोनोऑक्साइड को इस रूप में देखा गया है।
एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में दूसरी स्टडी प्रकाशित की गई है। इसमें खगोलविदों ने एक बेहद गर्म ग्रह के बारे में बताया है। इस बाह्यग्रह का नाम KELT-20b है जो 400 प्रकाशवर्ष दूर मौजूद है। वैज्ञानिकों ने इसकी जांच की तो पता चला कि पैराबैंगनी किरणों की बौछार यहां के वायुमंडल में एक परत बनाए हुए है।