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दुनिया के दो अरब लोगों के भोजन में कीड़े शामिल, ऐसा सच जिसे जानकर चौंकना लाजमी
बीबीसी हिंदी
Updated Mon, 08 Oct 2018 02:53 PM IST
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अगर आप थोड़ी देर रुक कर ऊपर की तस्वीर को देखेंगे तो शायद आपको लगेगा , ये कोई आम ब्रेड ही है, लेकिन ये साधारण ब्रेड नहीं है बल्कि कॉक्रोच से बना ब्रेड है। सही शब्दों में कहें तो ब्रेड बनाने के लिए जिस आटे का इस्तेमाल हुआ है उसमें सूखे कॉक्रोचों से बना आटा मिलाया गया है।
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संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार साल 2050 तक दुनिया की जनसंख्या 9.7 अरब हो जाएगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि यही कारण है कि अब खाने में कीड़ों को भी शामिल करने का वक्त आ गया है। वो कहते हैं कीड़े आसानी से मिलते हैं, प्रोटीन से भरे होते हैं और इनकी कीमत भी कम होती है।
दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में ये भोजन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन तस्वीर में जो ब्रेड है वो आपके-हमारे किचन में दिखने वाले आम कॉक्रोच से नहीं बना है बल्कि एक कॉक्रोच की एक ख़ास तरह की प्रजाति से बना है। इस प्रजाति को कहते हैं लोकस्ट कॉक्रोच (नोफीटा सिनेरा) और ये उत्तर अफ्रीका में मिलता है।
दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में ये भोजन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन तस्वीर में जो ब्रेड है वो आपके-हमारे किचन में दिखने वाले आम कॉक्रोच से नहीं बना है बल्कि एक कॉक्रोच की एक ख़ास तरह की प्रजाति से बना है। इस प्रजाति को कहते हैं लोकस्ट कॉक्रोच (नोफीटा सिनेरा) और ये उत्तर अफ्रीका में मिलता है।
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ये आसानी से बढ़ते हैं और इनका प्रजनन भी जल्दी होता है। लेकिन सवाल ये उठता है कि दुनिया में हज़ारों तरह के कीड़े-मकोड़े हैं, खाने के लिए कॉक्रोच ही क्यों? इसका मुख्य कारण है - ये प्रोटीन के लिए रेड मीट से भी बेहतर उपाय है। जहां रेड मीट का 50 फीसदी हिस्सा प्रोटीन होता है। इसका 70 फीसदी सिर्फ प्रोटीन होता है।
कॉक्रोच हजारों सालों से दुनिया में हैं और इस कारण इवोल्यूशन के पूरे दौर से होते हुआ आज के दौर तक पहुंचे हैं। दक्षिण ब्राजील के फेडेरल यूनिवर्सिटी ऑफ रियो ग्रांद में फूड इंजीनियर आंद्रीसा जेन्तजेन कहती हैं, "वातावरण से तालमेल मिलाने और लाखों सालों तक जिंदा रहने के लिए कॉक्रोचों ने जरूर कुछ खास गुण अपनाए होंगे?"
कॉक्रोच हजारों सालों से दुनिया में हैं और इस कारण इवोल्यूशन के पूरे दौर से होते हुआ आज के दौर तक पहुंचे हैं। दक्षिण ब्राजील के फेडेरल यूनिवर्सिटी ऑफ रियो ग्रांद में फूड इंजीनियर आंद्रीसा जेन्तजेन कहती हैं, "वातावरण से तालमेल मिलाने और लाखों सालों तक जिंदा रहने के लिए कॉक्रोचों ने जरूर कुछ खास गुण अपनाए होंगे?"
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प्रोटीन से भरे ब्रेड
फूड इंजीनियर लॉरेन मेनेगन के साथ मिल कर जेन्तजेन कॉक्रोचों को सुखा कर उनका आटा बनाने में कामयाब हुईं। इस आटे की कीमत थी 51 अमरीकी डॉलर (यानी 3,700 रुपए) प्रति किलो। लेकिन ब्रेड बनाने के लिए कॉक्रोच के आटे का मात्र 10 फीसदी ही इस्तेमाल हुआ, इसे साधारण गेंहू के आटे में मिलाया गया। हालांकि इससे भी काम नहीं बना।
जेन्तजेन ने बीबीसी को बताया, "थोड़ी मात्रा में इसे मिलाने भर से आटे में प्रोटीन 133 फीसदी तक बढ़ गई। "100 ग्राम घर में बना साधारण ब्रेड अगर 9.7 ग्राम प्रोटीन दे सकता है, इसकी तुलना में कॉक्रोच ब्रेड में 22.6 ग्राम प्रोटीन होता है। शोधकर्ता बताते हैं कि, "हम इस रेसिपी में फैट यानी तेल की मात्रा को 68 फीसदी तक कम करने में कामयाब हो गए हैं।"
फूड इंजीनियर लॉरेन मेनेगन के साथ मिल कर जेन्तजेन कॉक्रोचों को सुखा कर उनका आटा बनाने में कामयाब हुईं। इस आटे की कीमत थी 51 अमरीकी डॉलर (यानी 3,700 रुपए) प्रति किलो। लेकिन ब्रेड बनाने के लिए कॉक्रोच के आटे का मात्र 10 फीसदी ही इस्तेमाल हुआ, इसे साधारण गेंहू के आटे में मिलाया गया। हालांकि इससे भी काम नहीं बना।
जेन्तजेन ने बीबीसी को बताया, "थोड़ी मात्रा में इसे मिलाने भर से आटे में प्रोटीन 133 फीसदी तक बढ़ गई। "100 ग्राम घर में बना साधारण ब्रेड अगर 9.7 ग्राम प्रोटीन दे सकता है, इसकी तुलना में कॉक्रोच ब्रेड में 22.6 ग्राम प्रोटीन होता है। शोधकर्ता बताते हैं कि, "हम इस रेसिपी में फैट यानी तेल की मात्रा को 68 फीसदी तक कम करने में कामयाब हो गए हैं।"
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उनका दावा है कि स्वाद के मामले में ये सौ फीसदी आटे से बने साधारण ब्रेड जैसा ही होता है। वो कहते हैं, "हमने ब्रेड के स्वाद, टेक्सचर, खुशबू और रंग की भी अच्छे से जांच की है और हमने पाया है कि ये साधारण ब्रेड के जैसा ही है। हां कुछ लोगों को ये इसमें पीनट की खुशबू आ सकती है।"
न्यूट्रीशन प्रोफेसर इनो विएरा इंसान के भोजन में कीड़ों-मकोड़ों के इस्तेमाल के मामलों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी रखते हैं। वो कहते हैं, "झींगुर, ततैया, चींटियां, तितली, रेशम के कीड़े और बिच्छु ऐसे कई कीड़े हैं जो हमारे खाने का हिस्सा बन सकते है।" "हम कीड़ों को क्यों अपने खाने में अपना नहीं पाते इसके पीछे हमारी सांस्कृतिक समस्याएं हैं।"
न्यूट्रीशन प्रोफेसर इनो विएरा इंसान के भोजन में कीड़ों-मकोड़ों के इस्तेमाल के मामलों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी रखते हैं। वो कहते हैं, "झींगुर, ततैया, चींटियां, तितली, रेशम के कीड़े और बिच्छु ऐसे कई कीड़े हैं जो हमारे खाने का हिस्सा बन सकते है।" "हम कीड़ों को क्यों अपने खाने में अपना नहीं पाते इसके पीछे हमारी सांस्कृतिक समस्याएं हैं।"