False Flag Attack: रूस और यूक्रेन युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं। दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है जिसके बाद 30 देशों का समूह नाटो भी ऐक्शन में आ गया है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच किसी भी समय युद्ध छिड़ सकता है। रूस ने यूक्रेन के डोन्त्सक और लुहांस्क शहरों को अलग देश की मान्यता देने के बाद वहां पर कब्जा करने के लिए सैनिकों को भेज दिया है। कहा जा रहा है कि यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर में रूस के 100 से ज्यादा मिलिट्री ट्रक प्रवेश कर चुके हैं। तो वहीं अमेरिका ने भी बाल्टिक देशों में अपने सैनिक व हथियार भेजने शुरू कर दिए हैं। संभावना यह भी जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में रूस अपनी सेना को यूक्रेन की राजधानी कीव में भी भेज सकता है। भारत समेत दुनिया के कई देश चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच जंग न हो।
False Flag Attack: जानिए क्या है ''फॉल्स फ्लैग'' अटैक, रूस-यूक्रेन युद्ध की आशंका के बीच क्यों हो रही इसकी चर्चा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुतिन ने कहा है कि इस संकट से बचने के लिए यूक्रेन के पास सिर्फ यही रास्ता बचा है। उन्होंने शर्त रखी है कि क्रीमिया को रूस के हिस्से के तौर पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता दे। यूक्रेन की नाटो सदस्यता छोड़ दे और हथियारों के शिपमेंट को तुरंत रोक दे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने यह भी कहा है कि अब शांति समझौता खत्म हो चुका है। तो युद्ध की आशंकाओं के बीच आइए जानते हैं कि फॉल्स फ्लैग अटैक क्या है?
यह हमला एक तरह की सैन्य कार्रवाई है। इस हमले में एक देश अपने ही संपत्तियों और इंसान को नुकसान पहुंचाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि दुनिया को इसे दूसरे देश की हरकत बताता है। इसकी आड़ में दूसरे के ऊपर हमला करता है। बताया जाता है कि फॉल्स फ्लैग अटैक की उत्पत्ति समुद्री लुटेरों के लिए की गई थी। समुद्री लुटेरे मैत्रीपूर्ण यानी झूठे झंडे लगाकर व्यापारी जहाजों को अपने नजदीक लाने के लिए आकर्षित करते थे। समुद्री लुटेरे व्यापारी जहाजों पर हमला कर लूटने के लिए ऐसा करते थे।
20वीं शताब्दी में 'फॉल्स फ्लैग अटैक' से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई थीं। साल 1939 में नाजी जर्मनी के एजेंटों ने पौलेंड बाॅर्डर के पास एक जर्मन रेडियो स्टेशन से जर्मन-विरोधी संदेश का प्रसारण किया और कई नगारिकों को मार दिया। नाजी जर्मनी के एजेंटों ने मारे गए लोगों को पोलिश सैन्य वर्दी पहना दी थी। उन्होंने पोलैंड पर जर्मनी का नियोजित हमला बताने के लिए ऐसा किया था। इसी साल सोवियत संघ ने भी फिनलैंड की सीमा से अपने क्षेत्रों में बम फेंके और इसका फिनलैंड पर आरोप लगाया।
तीसरे विश्व युद्ध की आशंका
रूस और यूक्रेन के बीच तनाव के बाद तीसरे विश्व युद्ध की संभावनाएं जताई जाने लगी हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ता है, तो यह तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले सकता है।