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Interesting Facts: सपने देखने के दौरान क्यों हिलती हैं हमारी पलकें, नए शोध में हुआ खुलासा
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Fri, 02 Sep 2022 05:55 PM IST
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- फोटो : istock
Rapid Eye Movements: आपको जानकर हैरानी होगी कि सपने देखना केवल इंसानों की ही आदत नहीं होती, बल्कि कई जानवर भी सोते समय कल्पना की दुनिया में चले जाते हैं। इस बात की जानकारी इस तरह मिली कि सपने देखते समय हमारी बंद आंखों में भी सक्रियया नजर आती है। दरअसल, इस दौरान मांसपेशियों में गतिविधि होती है, जो साफ साफ देखी जा सकती है। लेकिन ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर सपने देखने के दौरान आखिर हमारी पलकें क्यों हिलती हैं। इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए वैज्ञानिक दशकों से लगे हुए हैं। ऐसे में चूहों के मस्तिष्क पर किए गए नए अध्ययन के जरिए शोधकर्ता ये इस सवाल के जवाब के करीब आ गए हैं, कि जब हम सपना देखते है तो हमारी आंखों की पुतली के पीछे संचलन क्यों होती है। आज हम आपके इसी के बारे में बताने जा रहा है। तो आइए जानते हैं...
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बहुत समय से किया जा रहा है अध्ययन
इस संचलन को लेकर वैज्ञानिक काफी लंबे समय से अध्ययन कर रहे हैं। जब हम सपने देखने के तुरंत बाद जागते हैं, तो हमारी आंखों में ज्यादा सक्रियता दिखाई देती है। इसके पीछे की वजह ये मानी जाती है कि सपने में दिखाई देने वाले दृश्यों की अनुभूति के कारण ये संचलन होती होगी।
इस संचलन को लेकर वैज्ञानिक काफी लंबे समय से अध्ययन कर रहे हैं। जब हम सपने देखने के तुरंत बाद जागते हैं, तो हमारी आंखों में ज्यादा सक्रियता दिखाई देती है। इसके पीछे की वजह ये मानी जाती है कि सपने में दिखाई देने वाले दृश्यों की अनुभूति के कारण ये संचलन होती होगी।
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जागे हुए लोगों के अनुभवों के आधार पर
हालांकि, ये बात कितनी भी विश्वसनीय हो, लेकिन असल में इसकी पुष्टि करना बहुत ही मुश्किल है। इस शोध में हुए अभी तक के अधिकतर अध्ययन नींद से जागने वाले के लोगों के बताए अनुभवों पर आधारित हैं। इसी से शोधकर्ता आंखों की हलचल से सपनों को जोड़ते हैं। लेकिन फिर भी इसपर पूरी तरह से विश्वास नहीं किया जा सरता है।
हालांकि, ये बात कितनी भी विश्वसनीय हो, लेकिन असल में इसकी पुष्टि करना बहुत ही मुश्किल है। इस शोध में हुए अभी तक के अधिकतर अध्ययन नींद से जागने वाले के लोगों के बताए अनुभवों पर आधारित हैं। इसी से शोधकर्ता आंखों की हलचल से सपनों को जोड़ते हैं। लेकिन फिर भी इसपर पूरी तरह से विश्वास नहीं किया जा सरता है।
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इसके अलावा अन्य शोधकर्ताओं ने भी इस बात पर जोर दिया है कि आंखों की तीव्र संचलन सपनों के बीना भी होते हैं। ज्यादातर ऐसा छोटे बच्चों में होता है। इसके साथ ही मस्तिक का आघात झेलने वाले लोगों के साथ भी ऐसा होते देखा गया है।
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इससे ये समझा जा सकता है कि हम आंखों में तीव्र संचलन के बिना भी सपने देख सकते हैं। लेकिन फिर बात यहां आकर अटक जाती है कि सारे के सारे अध्ययन इस स्कैनिंग अवधारणा का समर्थन नहीं करते। इसके अलावा इसके पीछे का एक कारण ये भी माना जाता है कि ये दिमाग के अचेतन मन से संपर्क टूटने पर उपत्पन्न तंत्रिका प्रतिक्रिया वाली मूलभूत गतिविधि भी हो सकती है।