आपने अक्सर सुना होगा कि पानी कभी एक्सपायर नहीं होता, लेकिन जब आप पानी की बोतल खरीदते हैं, तो बाकि पेय पदार्थ की ही तरह इसमें भी आपको एक्सपायरी डेट लिखी हुई नजर आती है। ऐसे में हमारे मन में संदेह उत्पन्न होता है कि अगर पानी कभी एक्सपायर नहीं होता तो इसपर एक्सपायरी डेट क्यों लिखी होती है। क्या ये एक्सपायरी डेट बोतल की होती है? या फिर बोतल में पानी को बंद करने की प्रक्रिया में कुछ ऐसा होता है, जो पानी को खराब कर देता है? आइए जानते हैं इसका सही जवाब क्या है...
Interesting Fact: अगर पानी नहीं होता है एक्सपायर, तो बोतलबंद पानी पर क्यों लिखी जाती है एक्सपायरी डेट?
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पानी की बोतलों पर डाले जाते हैं लॉट कोड
अंतर्राष्ट्रीय बोतलबंद पानी संघ (IBWA) के अनुसार, कुछ कंपनियां पानी की बोतलों पर तारीख के मुताबिक लॉट कोड डालती हैं, जिसकी मदद से डिस्ट्रिब्यूशन के लिए स्टॉक रोटेशन मैनेज करने में आसानी होती है। ये लॉट कोड प्रोडक्ट रिकॉल, पानी के दूषित होने और बॉटलिंग की गड़बड़ियों का पता लगाने में भी काम आते हैं।
IBWA का कहना है कि बोतलों पर तारीख के हिसाब से लिखे ये लॉट कोड, असल में एक्सपायरी डेट नहीं होते. बल्कि ये लोगों को ये तय करने में मदद करती है कि उन्हें पहले सबसे पुरानी बोतल का इस्तेमाल करना लेनी चाहिए।
डिस्पोजेबल बोतल या रीयूजेबल बोतल कौन है बेहतर?
इसके अलावा एक और सवाल ये उठता है कि हमें डिस्पोजेबल बोतलों का इस्तेमाल करना चाहिए या रीयूजेबल बोतलों का? तो ध्यान रहे कि हमें रीयूजेबल बोतलों का ही इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि ये जेब के लिए भी अच्छा है और पर्यावरण के लिए भी।
हालांकि, ये एक चिंता का विषय है कि बोतलबंद पानी को लंबे समय तक स्टोर करके रखने से स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है। इसके वजह ये है कि कई पानी की बोतलों में अभी भी रासायनिक BPA होता है, जिसे बिस्फेनॉल-ए (Bisphenol-A) कहा जाता है। इस बात पर अभी भी बहस जारी है कि बीपीए का स्वास्थ्य पर कैसा प्रभाव है।