El Nino Alert: भारत समेत पूरी दुनिया को साल 2026 में मौसम की मार झेलनी पड़ सकती है। इसकी वजह सुपर अल नीनो है, जिसके बारे में राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) की जलवायु पूर्वानुमान केंद्र की तरफ से एक नया पूर्वानुमान जारी किया गया है। इसमें बताया गया है कि अक्तूबर 202 से लेकर फरवरी 2027 तक सुपर अल नीनो की सबसे ज्यादा संभावना है। इसके कारण दुनिया में कहीं कम बारिश, कहीं सूखा, तो कहीं बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही अल नीनो की वजह से मानसूनी बारिश कम होने की चिंता जताया है।
El Nino: क्या आएगा 1877 वाला प्रलय? जब भीषण गर्मी और सूखा ने मचाई थी भयानक तबाही, दुनिया पर अल नीनो का खतरा
El Nino Alert: राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) की जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने अल नीनो को एक नया पूर्वानुमान जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि अक्तूबर 202 से लेकर फरवरी 2027 तक सुपर अल नीनो की सबसे ज्यादा संभावना है।
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अल-नीनो ने किया था पूरी दुनिया तबाह
अल-नीनो ने 1876 से 1878 के बीच पूरी दुनिया में तबाही मचाई थी। भारत, चीन, ब्राजील और अफ्रीका के बड़े इलाके में भीषण सूखा पड़ा था। पूरी तरह से मानसून फेल हो गया था। उस समय फसलें नष्ट हो गईं, पशु मर गए और करोड़ों लोगों की भूख से तड़प-तड़प कर मौत हो गई। अनुमान के मुताबिक, उस दौरान दुनिया की दो से तीन फीसदी यानी तीन से छह करोड़ लोगों की जान गई थी। कई विशेषज्ञों ने 5 करोड़ लोगों की मौत का अनुमान जताया था।
अकाल ने भारत में मचाई सबसे अधिक तबाही
अल नीनो की वजह से पड़े अकाल ने भारत में सबसे अधिक तबाही मचाई थी। रिपोर्ट्स में कहा कि अनुमान के मुताबिक, 1.2 से 2.9 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। चीन के उत्तरी भाग में फसलें खराब हो गई थीं, ब्राजील का उत्तर-पूर्वी इलाका सूखा से तबाह हो गया था। अफ्रीका के कई हिस्सों को खाने की कमी का सामना करना पड़ा। उस समय कोई नहीं जानता है कि दुनिया में घट रही घटनाओं का एक ही कारण था। वह कारण था प्रशांत महासागर में बना शक्तिशाली अल नीनो।
क्यों 1877 में अल-नीनो ने मचाई थी तबाही?
कोलंबिया यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता दीप्ति सिंह और उनकी टीम का कहना है कि 1877 से पहले प्रशांत महासागर का उष्णकटिबंधीय क्षेत्र कई साल तक असामान्य रूप से ठंडा रहा, जिससे पश्चिमी प्रशांत में बहुत अधिक मात्रा में गर्मी इकट्ठा हो गई। अचानक सिस्टम में बदलाव होने से एक शक्तिशाली अल नीनो बन गया। भारतीय महासागर में भी तापमान में काफी अंतर देखा गया। उत्तर अटलांटिक भी उस समय के लिहाज से गर्म था। इन सभी के मिले-जुले प्रभाव से अल नीनो बना था। पेड़ों की रिंग्स अध्ययन के मुताबिक, एशिया के कुछ इलाकों ने 800 साल में सबसे भीषण सूखा का सामना किया था। वैज्ञानिक का मानना है कि यह मानवता पर पड़ी सबसे भयानक पर्यावरणीय आपदा है।
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क्या है सबसे बड़ी चिंता?
वैज्ञानिकों की चिंता है कि 2026 में 1877 की तरह या उससे भी ज्यादा शक्तिशाली अल नीनो बन रहा है। तेजी से प्रशांत महासागर गर्म हो रहा है और समुद्र की सतह के नीचे का तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है। कुछ मॉडल्स में 1877 के रिकॉर्ड को तोड़ने की आशंका जताई गई है। वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि 1877 में दुनिया ठंडी थी, लेकिन 2026 में समुद्र पहले से ही रिकॉर्ड गर्म हैं। वैश्विक स्तर पर तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में सुपर अल नीनो आने पर इसके प्रभाव कई गुना बढ़ सकते हैं।
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2026 में किन-किन चीजों पर पड़ेगा प्रभाव
2026 में लोगों भयानक हीटवेव का करना पड़ सकता है। कई इलाकों में तापमान इतना ज्यादा हो सकता है कि लोगों के लिए सामान्य जीवन कठिन हो जाए। फसलें सुख सकती हैं। पानी की कमी और सूखा पड़ने से नदियां, तालाब और भूजल स्तर तेजी से नीचे जाएगा। सूखे और गर्मी से जंगलों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ सकती हैं। अगर यह सुपर अल नीनो बनता है, तो 2027 में वैश्विक स्तर पर तापमान का नया रिकॉर्ड बन सकता है।
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क्यों भारत पर है सबसे बड़ा खतरा?
भारत में अल नीनो सबसे ज्यादा मानसून को प्रभावित करता है। इससे मानसून कमजोर होता है। इसके कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में सूखा पड़ सकता है। इससे लाखों किसान प्रभावित होंगे। खाद्यान्न की कमी, कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ इसलिए सरकारों, किसानों और आम लोगों को अभी से तैयारी करनी चाहिए।