महंगाई के इस दौर में हर कोई अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहता है। सभी लोग अपना पैसा बढ़ाने का प्रयास करते रहते हैं। ऐसे में हम आज आपको पोस्ट ऑफिस की स्मॉल सेविंग स्कीम्स में से पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) के बारे में जारकारी दे रहे हैं, जहां निवेश करने से आपको मोटा मुनाफा होगा।
इस सरकारी योजना के बदले पांच नियम, जान लें वरना हो सकता है नुकसान
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पीपीएफ खाता खोलने से जुड़ा बदला यह नियम
डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स ने पीपीएफ खाता खोलने के लिए मिनिमम अमाउंट में बदलाव किया गया है। अब अगर आप किसी नाबालिग के खाते में पैसे जमा करते हैं, तो आपको ध्यान रखना होगा कि यह रकम 500 रुपये से कम नहीं होनी चाहिए। राशि 50 रुपये के मल्टीपल में ही होनी चाहिए। साथ ही पीपीएफ खाता खोलने के लिए अब फॉर्म ए की जगह फॉर्म 1 भरना होगा।
मेच्योरिटी से जुड़ा नियम भी बदला
पीपीएफ खाते की डिपॉजिट के साथ मेच्योरिटी से जुड़े एक नियम में भी बदलाव हुआ है। पीपीएफ खाते का मेच्योरिटी पीरियड 15 साल का होता है। लेकिन आप इसके बाद खाते को अगले पांच साल के लिए आगे बढ़ा सकते हैं। इसके लिए उन्हें मेच्योरिटी पीरियड खत्म होने से एक साल के भीतर फॉर्म 4 जमा करना होगा। जबकि पहले इसके लिए फॉर्मा एच भरना होता था।
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बिना डिपॉजिट किए जारी रख सकते हैं खाता
वहीं अगर आप मेच्योरिटी के बाद बिना डिपॉजिट किए भी पीपीएफ खाते को जारी रख सकते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं, तो मेच्योरिटी के समय जो भी रकम होगी, उस पर भी आपको ब्याज मिलता रहेगा। ब्याज से जुड़ी जानकारी सब्सक्राइबर को दे दी जाएगी। बिना डिपॉजिट के पीपीएफ खाते को मेच्योरिटी के बाद भी जारी रखने की स्थिति में आपको एक वित्तीय वर्ष में एक बार निकासी का मौका मिलेगा।
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पीपीएफ लोन ब्याज दर
अगर आपने पीपीएफ खाते के आधार पर लोन लिया है, तो यह बदलाव आपके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। लोन लेने के बाद आप इसका प्रिंसिपल अमाउंट पे-इन-स्लिप के जरिए जमा कर सकते हैं। इसे आपके लोन खाते में क्रेडिट किया जाएगा। इसके बाद जब प्रिंसिपल राशि पूरी तरह से चुका दी जाएगी, तो सब्सक्राइबर्स सालाना एक फीसदी की दर से ब्याज के आधार पर दो महीने से कम के इंस्टॉलमेंट में ब्याज की रकम जमा कर सकते हैं। इसका भुगतान लोन के भुगतान होने के अगले महीने से शुरू हो जाएगा। पीपीएफ खाते के आधार पर लोन लिया है, तो इस बात का ध्यान रखें कि लोन की राशि समय पर नहीं चुकाने पर पेनल्टी के तौर पर आपको सालाना छह फीसदी की दर से ब्याज देना होगा।