'नो ईएमआई टिल पजेशन' से बढ़ सकता है होम लोन का बोझ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिल्डर अपनाते हैं ये फंडा
ऐसी योजनाओं का आकलन करने से पता चलता है कि इसके कई ऐसे पहलू हैं, जो मकान खरीदने वालों की दिक्कतें बढ़ा सकते हैं। इसमें ज्यादातर बिल्डर एक जैसे ही फ्लैट की कीमत भुगतान योजना के हिसाब से तय करते हैं। यानी एक ही घर के अलग-अलग भाव होते हैं, जिसमें नो ईएमआई महंगी पड़ती है। चूंकि, बिल्डर आपसे ज्यादा पैसे वसूलता है इसलिए उसे ईएमआई का भुगतान करने के बाद भी मुनाफा हो जाता है। इस तरह बिल्डर की ओर से भुगतान की गई ईएमआई भी एक तरह से आपके मकान की कीमत में जुड़ जाती है।
बैंक भी वसूलते हैं ज्यादा ब्याज
ऐसी योजनाओं में मंजूर होने वाले कर्ज पर निर्माण के दौरान भी ब्याज लगता है। बिल्डर सिर्फ इसी ब्याज का भुगतान बैंक को करते हैं, जिसे प्री-ईएमआई भी कहते हैं। इस तरह आपके कर्ज का मूलधन कब्जा मिलने के बाद भी उतना ही बना रहता है। चूंकि, ऐसी योजनाओं को चुनिंदा बैंक ही कर्ज देते हैं, जो इस पर सामान्य से ज्यादा ब्याज भी वसूलते हैं। इस तरह कुछ समय के लिए ईएमआई से छूट के चक्कर में उन्हें ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।
तीन सहूलियत
- किराये पर रहने वालों को मकान का कब्जा मिलने तक दोतरफा भुगतान नहीं करना होगा।
- निर्माण के दौरान बढ़ने वाली मकान की कीमत का फायदा मिलता है।
- जुर्माने से बचने के लिए बिल्डर समय पर कब्जा देने का दबाव रहता है।
तीन संकट
- एक ही मकान की अलग-अलग कीमत होने से बिल्डर जैसे पैसे वसूल सकते हैं।
- कब्जा मिलने में देरी पर किराये के साथ ईएमआई का भुगतान भी करना पड़ सकता है।
- इन योजनाओं में ज्यादा जोखिम होने से बैंक अधिक लागत पर देते हैं कर्ज।