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हड़प्पा काल से वर्तमान तक की संस्कृति लकड़ी पर उतार दी, गजब है इस टीचर की कला
Thu, 14 Jan 2021 11:47 AM IST
निवेदिता वर्मा
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 14 Jan 2021 11:47 AM IST
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चंडीगढ़ के ललित कला शिक्षक परवेश कुमार और उनकी कलाकृति।
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ के ललित कला शिक्षक परवेश कुमार ने चंडीगढ़ के पांच हजार साल के इतिहास को शीशम की लकड़ी पर उतार दिया है। इसमें शहर के निर्माण और उससे पहले की संस्कृति की झलक देखी जा सकती है। परवेश ने अपने आर्ट वर्क में प्राचीन और आधुनिक संस्कृति दोनों को दिखाने की कोशिश की है, ताकि लोग शहर के पूरे इतिहास के बारे में जान सकें।
परवेश कुमार
- फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित आदर्श उच्च विद्यालय के ललित कला शिक्षक परवेश कुमार ने शहर में हुए बदलाव को मूर्तिकला के माध्यम से एक लकड़ी पर चित्रित किया है। इसमें शहर के निर्माण और उससे पहले की संस्कृति की झलक देखी जा सकती है।
परवेश कुमार की बनाई कलाकृति।
- फोटो : अमर उजाला
मूर्तिकला में हड़प्पा संस्कृति के खत्म होने पर बने पोआध गांव और उसके बाद ली कार्बूजिए के मॉडर्न आर्किटेक्टर को क्रमबद्ध तरीके से दर्शाया गया है। परवेश ने बताया कि वर्तमान में ज्यादातर लोग चंडीगढ़ के नए इतिहास ली कार्बूजिए के आर्किटेक्टर से ही परिचित हैं। पुराना इतिहास मॉडर्न डिजाइन के नीचे छिप गया है। परवेश ने बताया कि मूल रूप से जालंधर के निवासी होने के कारण वह पंजाब के इतिहास से परिचित थे। जब उन्होंने चंडीगढ़ के बारे में शोध किया तो पता चला कि 1967 में चंडीगढ़ विस्तार के दौरान हुई खुदाई में हड़प्पा संस्कृति के अवशेष भी मिले थे। 2012 से वह इस ऐतिहासिक विषय पर अपने आर्ट वर्क बना रहे हैं।
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कलाकृति बनाते परवेश कुमार।
- फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ से होता था मेसोपोटामिया में व्यापार
परवेश ने बताया कि वर्तमान सेक्टर-17 में जहां मॉडर्न आर्किटेक्टर की इमारतें बनी हैं। पांच हजार साल पहले वहां हड़प्पाकालीन बस्ती हुआ करती थी। इस क्षेत्र से मेसोपोटामिया के साथ व्यापार हुआ करता था। यह क्षेत्र अब इराक में है। सेक्टर-17 में खुदाई के दौरान विदेशी व्यापारिक गतिविधियों के सबूत, सील, बैलगाड़ी, कंकाल इत्यादि मिले थे। इनमें कुछ अवशेष सेक्टर-19 के ली-कार्बूजिए म्यूजियम में रखे गए हैं। सेक्टर-17 के कश्मीर इम्पोरियम, अंडरग्राउंड पार्किंग, पीएसआईडीसी इमारत, इंडियन बैंक इमारत, यूनियन बैंक इमारत, हॉट मिलियन के आसपास से हड़प्पा के अवशेष मिले थे।
परवेश ने बताया कि वर्तमान सेक्टर-17 में जहां मॉडर्न आर्किटेक्टर की इमारतें बनी हैं। पांच हजार साल पहले वहां हड़प्पाकालीन बस्ती हुआ करती थी। इस क्षेत्र से मेसोपोटामिया के साथ व्यापार हुआ करता था। यह क्षेत्र अब इराक में है। सेक्टर-17 में खुदाई के दौरान विदेशी व्यापारिक गतिविधियों के सबूत, सील, बैलगाड़ी, कंकाल इत्यादि मिले थे। इनमें कुछ अवशेष सेक्टर-19 के ली-कार्बूजिए म्यूजियम में रखे गए हैं। सेक्टर-17 के कश्मीर इम्पोरियम, अंडरग्राउंड पार्किंग, पीएसआईडीसी इमारत, इंडियन बैंक इमारत, यूनियन बैंक इमारत, हॉट मिलियन के आसपास से हड़प्पा के अवशेष मिले थे।
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परवेश कुमार की बनाई कलाकृति।
- फोटो : अमर उजाला
धड़ सारंगी और कविश्री गायकी पोआध क्षेत्र की देन
पोआध शब्द पूर्व और आध से मिलकर बना है। यह पंजाब के पूर्वी इलाके के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। कला के क्षेत्र में धड़ सारंगी और कविश्री गायकी पोआध क्षेत्र के कलाकारों की ही देन हैं। अकबर के दरबार में कवि माई बन्नो भी इसी क्षेत्र की थी। पोआध क्षेत्र के लोगों की बोली में पंजाबी और हरियाणवी दोनों की झलक मिलती है।
पोआध शब्द पूर्व और आध से मिलकर बना है। यह पंजाब के पूर्वी इलाके के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। कला के क्षेत्र में धड़ सारंगी और कविश्री गायकी पोआध क्षेत्र के कलाकारों की ही देन हैं। अकबर के दरबार में कवि माई बन्नो भी इसी क्षेत्र की थी। पोआध क्षेत्र के लोगों की बोली में पंजाबी और हरियाणवी दोनों की झलक मिलती है।