चंडीगढ़ में एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ। एक प्राइवेट स्कूल में पेड़ गिरने से एक बच्ची की मौत हो गई। वहीं 16 छात्राएं और महिला घायल हो गई। 250 साल पुराने एक पेड़ ने कई जिंदगियां तबाह कर डाली हैं। अभिभावकों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। पेड़ की चपेट में आने के बाद गंभीर रूप से घायल पीजीआई में भर्ती छात्रा ईशिता का बायां हाथ काटना पड़ा है। वहीं, महिला अटेंडेंट शीला की स्थिति भी बेहद गंभीर बनी हुई है। सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण उसे पीजीआई एडवांस ट्रामा सेंटर की आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया है। इनके अलावा छात्रा सेजल के लंबर स्पाइन में गंभीर चोट आई है। उसकी सर्जरी की भी योजना बनाई जा रही है।
स्कूल में गिरा पेड़: ईशिता का काटना पड़ा बायां हाथ, शीला की स्थिति गंभीर, हीराक्षी की मौत से शादी की सालगिरह गमगीन
पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पिविन कौशल ने बताया कि तीन छात्राओं और एक महिला अटेंडेंट को पीजीआई लाया गया था, जिसमें से एक छात्रा हीराक्षी की यहां आने से पहले ही मौत हो चुकी थी। वहीं एक छात्रा का बायां हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था और दूसरी छात्रा के स्पाइन में गंभीर चोट थी। इनके अलावा एक महिला के सिर पर गंभीर चोट आई थी। यहीं पहुंचते ही उन्हें घायलों का विशेषज्ञों ने इलाज शुरू कर दिया। सर्जन की टीम ने ईशिता के हाथ को बचाने का अंत तक प्रयास किया लेकिन ये संभव नहीं हो पाया। वहीं सेजल की स्पाइन इंजरी के इलाज के लिए सर्जरी की योजना बनाई जा रही है जबकि महिला की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
जीएमएसएच-16 से सभी डिस्चार्ज
जीएमएसएच-16 में भर्ती किए गए सभी छात्राओं को छुट्टी दे दी गई है। इनमें से ज्यादातर के अभिभावक उन्हें लेकर अलग-अलग निजी अस्पतालों में चले गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पीजीआई रेफर किए गए घायलों के अलावा अन्य सभी की स्थिति खतरे के बाहर है।
बेटी की मौत के गम में डूब गया शादी की सालगिरह का जश्न
शादी की सालगिरह का जश्न मनाने शिमला गए हीराक्षी के माता-पिता ने यह सोचा भी नहीं था कि अब वे अपनी बेटी से कभी नहीं मिल पाएंगे। बच्चों की जिद पर वे एक दिन पहले ही शिमला गए थे। हीराक्षी बड़ी बहन दिवाकरी और दादा आरएल कुमार के साथ चंडीगढ़ में थी। दुर्घटना की सूचना मिलते ही पिता पंकज कुमार और माता दमन कुमार चंडीगढ़ भागे।
पांच घंटे का सफर तय करना उनके लिए मुश्किल हो रहा था। ट्रामा सेंटर में दिवाकरी और आरएल कुमार के पास थोड़ी-थोड़ी देर पर उनकी कॉल आ रही थी। वहां हीराक्षी की कक्षा की कई छात्राएं व उनके माता-पिता मौजूद थे जो उसके दादा और दीदी को सांत्वना दे रहे थे। शिमला से चंडीगढ़ का सफर पीजीआई ट्रामा सेंटर आकर पूरा हुआ।