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दूसरे विश्व युद्ध के हीरो कर्नल रंधावा पंचतत्व में विलीन, देखिए तस्वीरें
ब्यूरो/अमर उजाला, होशियारपुर(पंजाब)
Updated Mon, 04 Jul 2016 12:39 PM IST
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दलजीत सिंह रंधावा का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
दूसरे विश्व युद्ध के हीरो और ब्रिटिश आर्मी के आखिरी भारतीय ऑफिसर दलजीत सिंह रंधावा को शनिवार को नम आंखों के साथ विदाई दी गई। देखिए तस्वीरें।
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दलजीत सिंह रंधावा का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
96 वर्षीय रंधावा का अंतिम संस्कार पंजाब के होशियारपुर में हरियाणा रोड स्थित भंगी चो पार शमशान घाट में किया गया। उन्होंने एक जुलाई को अंतिम सांस ली। सरकारी सम्मान के साथ उन्हें पंचतत्व में विलीन किया गया। सेना की ओर से गमगीन धुन बजाकर सलामी दी गई। उनके बेटों जसजीत सिंह रंधावा और अमनजीत सिंह रंधावा ने उन्हें मुखाग्नि दी। डीसी आनंदिता मित्रा ने भी कर्नल रंधावा के निधन पर शोक जताया।
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दलजीत सिंह रंधावा का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
बताया जा रह है कि कर्नल रंधावा लंबे समय से बीमार थे और मॉडल टाउन स्थित घर पर रह रहे थे। कर्नल रंधावा को मिलिट्री क्रॉस विशेष सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। वे ब्रिटिश आर्मी के आखिरी भारतीय अफसर हैं, जिन्हें कांगो में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अदम्य साहस दिखाने पर 22 साल की उम्र में क्रॉस मिला।
दलजीत सिंह रंधावा का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
कर्नल रंधावा 1947 में नई दिल्ली में हुई पहली स्वतंत्रता दिवस परेड के कमांडर थे। 1944 में दूसरे विश्व युद्ध में बर्मा मोर्चे के दौरान उन्होंने चार जापानी मार गिराए और स्वयं भी जख्मी हो गए थे। इसके बाद उन्हें वीरता पुरस्कार मिला। कर्नल रंधावा ऐसे अफसर थे जिन्होंने गोरे अमेरिकी लड़ाकों को रस्से से बांधा था। पिता को पाकिस्तान में मिंटगुमरी में 27 एकड़ जमीन दी गई। बंटवारे के बाद होशियारपुर के गांव फुगलाना में जमीन मिली।
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दलजीत सिंह रंधावा का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
कर्नल दलजीत सिंह रंधावा भारत के ऐसे पहले अफसर थे, जिन्होंने अमेरिकी सैनिकों को रस्सी से बांध दिया था। उन्हें 1963 में यूएन फोर्स के तहत कांगो भेजा गया था। वह मद्रास की यूनिट को कमांड कर रहे थे। उन्हें वहां लोकल डेमोक्रेटिक गवर्नमेंट को बचाना था। मुकाबला कड़ा था। विरोध में यूरोपीय और अमेरिकी लड़ाके थे। नई जमीन थी, लेकिन फिर भी रंधावा ने उन्हें बंधक बना लिया।