दिवाली पर इस बार बेहद खास योग, सुख-समृद्धि की होगी बरसात, पढ़ें- भैया दूज का शुभ मुहूर्त

संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 04 Nov 2021 12:44 AM IST
दीपावली
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इस साल दिवाली पर चतुग्रही योग बन रहा है। तुला राशि में सूर्य, चंद्र, मंगल और बुध की युति होगी। यह योग सुख-समृद्धि, भौतिक पदार्थों व धन-धान्य में वृद्धि करेगा। यह कहना है देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और चंडीगढ़ के सेक्टर 28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री का। उन्होंने कहा कि सागर मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या को लक्ष्मी माता प्रकट हुई थी। इस दिन लक्ष्मी माता की प्रसन्नता के लिए रात्रि में लक्ष्मी पूजन किया जाता है। दिवाली चार नवंबर दिन गुरुवार को है। इस दिन गणेश, लक्ष्मी, कुबेर का पूजन करना चाहिए। लक्ष्मी माता की पूजा षोडशोपचार से करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के समय आयुष्मान योग एवं स्वाति नक्षत्र का योग भी शुभ कारक है। कोई भी पूजा, अनुष्ठान, पाठ, यज्ञादि शुभ मुहूर्त में प्रारंभ करने चाहिए।
दिवाली
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लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त
  • चौघड़िया मुहूर्त: चर, लाभ, अमृत एवं शुभ की चौघड़ियां ही ग्राह्म होती हैं।
  • अमृत की चौघड़िया शाम 5.32 से 7.12 बजे तक।
  • चर की चौघड़िया शाम 7.12 से रात 8.32 बजे तक।
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दीवाली
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लाभ की चौघड़िया
  • रात्रि 12.11 बजे से रात 1.51 बजे तक।
  • प्रदोष काल मुहूर्त सायं 5.32 से रात्रि 8.12 बजे तक व्याप्त रहेगा।
  • स्थिर लग्न (वृष लग्न) पूजा के लिए विशेष प्रशस्त रहेगा। इसका समय शाम 6.11 बजे से रात्रि 8.05 बजे तक रहेगा।
  • निशीथ काल का समय रात्रि 8.12 से रात्रि 10.51 बजे तक रहेगा। इस समय श्रीसूक्त, कनक धारा स्तोत्र, लक्ष्मी स्तोत्रादि मंत्रों का पाठ करना चाहिए।
  • महानिशीथ काल रात्रि 10.51 से रात्रि 1.31 बजे तक रहेगा। इस अवधि में श्री काली उपासना, तंत्र आदि क्रियाएं, तांत्रिक अनुष्ठान, साधना, मंत्र सिद्धि आदि किए जाते हैं।
  • रात्रि 12.42 से 3.05 बजे तक सिंह लग्न अर्थात् स्थिर लग्न भी पूजा के लिए विशेष प्रशस्त होगा।
आतिशबाजी
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नरक चतुर्दशी 3 नवंबर को
ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। नरक चतुर्दशी 3 नवंबर बुधवार को है। इस दिन सूर्यास्त के समय सायंकालीन बेला में यमराज की प्रसन्नता के लिए दीपदान किया जाता है। चौमुखा दीपक सायंकाल में यमराज के निमित्त जलाने और यम तर्पण करने से व्यक्ति को यम यातना का भय नहीं रहता। इसी रात्रि में हनुमान जी ने जन्म लिया था, ऐसी भी किवदंती है। इसलिए इस चतुर्दशी को हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। सुंदरकांड का पाठ, हनुमान चालीसा, संकट मोचन आदि हनुमान जी के स्तोत्रों का पाठ करना चाहिए। इसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाता है।
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फाइल फोटो
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5 नवंबर को गोवर्धन पूजा
ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि दिवाली से अगले दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का विधान है। भगवान श्री कृष्ण की प्रसन्नता के लिए 56 प्रकार के पकवान बनाकर भगवान श्री जयकृष्ण एवं गिरिराज जी की पूजा की जाती है। इसी तिथि को विश्वकर्मा दिवस भी मनाया जाता है। जितने भी कारीगर लोग हैं श्रद्धाभाव से अपने औजारों की पूजा करते हैं।

भैया दूज 6 नवंबर को
देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। 6 नवंबर को भाई दूज का पर्व पड़ेगा। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। बहुत दिनों के बाद यमराज अपनी बहन यमुना जी को मिलने के लिए आए थे। तब से भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। बहनें ने अपने भाई की मंगल कामना के लिए उन्हें तिलक करती हैं। भाई बहनों को उपहार देते हैं।

तिलक का शुभ मुहूर्त
  • स्थिर लग्न प्रात: 7.38 बजे से सुबह 9.58 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.43 से दोपहर 12.26 बजे तक
  • विजय मुहूर्त दोपहर 1.32 से 2.17 बजे तक
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