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सावधान! दिनोंदिन चढ़ रहा पारा, हाइपरथर्मिया का खतरा बढ़ा... जानिए लक्षण और कैसे करें बचाव
Thu, 28 May 2020 12:30 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 28 May 2020 12:30 PM IST
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गर्मी का सितम
- फोटो : Social Media
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सूरज की तपिश से दिनोंदिन चढ़ रहा पारा लोगों की सेहत को प्रभावित करने लगा है। कोरोना संक्रमण के खतरे से लोग पहले ही परेशान हैं, अब तेज धूप और गर्मी से हाइपरथर्मिया का भी खतरा पैदा हो गया है। अस्पतालों की ओपीडी भी बंद है। इससे इलाज मिलना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में डॉक्टर लोगों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही जरूरी एहतियात बरतने को कह रहे हैं।
हीट स्ट्रोक
- फोटो : Amar Ujala
डॉक्टरों के मुताबिक, हाइपरथर्मिया की स्थिति से बचने का सबसे आसान तरीका है धूप और गर्म हवा से दूर रहना। चंडीगढ़ में सेक्टर-16 स्थित जीएमएसएच के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. वीके नागपाल ने बताया कि तापमान बढ़ने से हाइपरथर्मिया के बुखार में इलाज मिलने में देरी से मरीज की जान भी जा सकती है। इससे बचाव के लिए ठंडी तासीर वाले आहार लें। बासी या ज्यादा तला भुना भोजन न खाएं।
भीषण गर्मी में प्यास बुझाती लड़की
- फोटो : अमर उजाला
क्या है हाइपरथर्मिया
जब शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और इससे व्यक्ति की जान को खतरा होने की आशंका बढ़ जाती है तो इस स्थिति को हाइपरथर्मिया कहते हैं। कई स्थितियों में हाइपरथर्मिया हो सकता है। यह वातावरण में अधिक गर्मी होने या शरीर से पर्याप्त मात्रा में गर्मी बाहर न निकल पाने की स्थिति में होता है। यदि शरीर का तापमान 104 डिग्री फॉरेनहाइट से अधिक है तो यह गंभीर हाइपरथर्मिया का संकेत है।
धूप और गर्म हवा है कारण
तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण इसका खतरा बढ़ जाता है। बहुत देर तक धूप में या गर्म हवाओं के संपर्क में रहने से हाइपरथर्मिया हो सकता है। इसके अलावा खान-पान में की गई लापरवाही भी इसका कारण बन सकती है।
जब शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और इससे व्यक्ति की जान को खतरा होने की आशंका बढ़ जाती है तो इस स्थिति को हाइपरथर्मिया कहते हैं। कई स्थितियों में हाइपरथर्मिया हो सकता है। यह वातावरण में अधिक गर्मी होने या शरीर से पर्याप्त मात्रा में गर्मी बाहर न निकल पाने की स्थिति में होता है। यदि शरीर का तापमान 104 डिग्री फॉरेनहाइट से अधिक है तो यह गंभीर हाइपरथर्मिया का संकेत है।
धूप और गर्म हवा है कारण
तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण इसका खतरा बढ़ जाता है। बहुत देर तक धूप में या गर्म हवाओं के संपर्क में रहने से हाइपरथर्मिया हो सकता है। इसके अलावा खान-पान में की गई लापरवाही भी इसका कारण बन सकती है।
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भीषण गर्मी
इस बुखार में जा सकती है जान
हाइपरथर्मिया सामान्य बुखार से अलग होता है। इसमें शरीर का तापमान काफी अधिक हो जाता है। हीट बाहर निकल नहीं पाती। इस बुखार में अगर तत्काल इलाज शुरू न हुआ तो मरीज की जान जाने का खतरा रहता है। यह बुखार हीट स्ट्रोक और लू लगने से ज्यादा खतरनाक है। तेज धूप या तेज तापमान में काफी देर तक रहने से शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फॉरेनहाइट से कहीं अधिक हो जाता है।
इसलिए होता है ‘हाइपरथर्मिया’
डॉ. वीके नागपाल के अनुसार, तेज धूप से लोगों में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की समस्या हो जाती है, जो शुगर, बीपी और न्यूरो की दवाएं खाने वाले मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक है। तेज धूप और गर्मी से शरीर में सोडियम और पोटेशियम का संतुलन बिगड़ जाता है। इस कारण से लोगों में हाइपरथर्मिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
हाइपरथर्मिया सामान्य बुखार से अलग होता है। इसमें शरीर का तापमान काफी अधिक हो जाता है। हीट बाहर निकल नहीं पाती। इस बुखार में अगर तत्काल इलाज शुरू न हुआ तो मरीज की जान जाने का खतरा रहता है। यह बुखार हीट स्ट्रोक और लू लगने से ज्यादा खतरनाक है। तेज धूप या तेज तापमान में काफी देर तक रहने से शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फॉरेनहाइट से कहीं अधिक हो जाता है।
इसलिए होता है ‘हाइपरथर्मिया’
डॉ. वीके नागपाल के अनुसार, तेज धूप से लोगों में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की समस्या हो जाती है, जो शुगर, बीपी और न्यूरो की दवाएं खाने वाले मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक है। तेज धूप और गर्मी से शरीर में सोडियम और पोटेशियम का संतुलन बिगड़ जाता है। इस कारण से लोगों में हाइपरथर्मिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
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भीषण गर्मी
तेज बुखार के लक्षण
आंखों का लाल होना और जलन होना, खांसी, जोड़ों में दर्द, दस्त, त्वचा के ऊपर रैशेज पड़ना, थकान, मांसपेशियों या बदन में दर्द, तेज बुखार, सर्दी, गले में दर्द, सिर दर्द।
ऐसे करें बचाव
विटामिन सी या अन्य रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली चीजों का सेवन करें। सूती कपड़े पहनें। ठंडे कमरे या ठंडे स्थान पर रहें। शरीर के ज्यादा गर्म होने पर माथे पर गीली पट्टी रखें। ओआरएस, ग्लूकोज या नींबू पानी का सेवन करें। लस्सी, पन्ना, सत्तू का शर्बत जैसे पेय पदार्थ लें। धूप और तेज गर्मी से बचें। लौकी, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, मौसमी फल जैसे संतरा, अंगूर, आम और अनार खाएं।
तेज बुखार होने पर सिर पर कोल्ड स्पंजिंग करें। लिक्विड डाइट जैसे दही, मट्ठा, जीरा वाली छाछ, जलजीरा, लस्सी, आमपना आदि पीते रहें। शराब और धूम्रपान से तौबा करें। बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी तरह की दवाएं न लें। ये शरीर में गर्मी बढ़ाती हैं। घर से बाहर निकलते समय स्कार्फ से चेहरा ढकें और आंखों को सूरज की तेज किरणों से बचाने के लिए सनग्लास पहनें।
आंखों का लाल होना और जलन होना, खांसी, जोड़ों में दर्द, दस्त, त्वचा के ऊपर रैशेज पड़ना, थकान, मांसपेशियों या बदन में दर्द, तेज बुखार, सर्दी, गले में दर्द, सिर दर्द।
ऐसे करें बचाव
विटामिन सी या अन्य रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली चीजों का सेवन करें। सूती कपड़े पहनें। ठंडे कमरे या ठंडे स्थान पर रहें। शरीर के ज्यादा गर्म होने पर माथे पर गीली पट्टी रखें। ओआरएस, ग्लूकोज या नींबू पानी का सेवन करें। लस्सी, पन्ना, सत्तू का शर्बत जैसे पेय पदार्थ लें। धूप और तेज गर्मी से बचें। लौकी, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, मौसमी फल जैसे संतरा, अंगूर, आम और अनार खाएं।
तेज बुखार होने पर सिर पर कोल्ड स्पंजिंग करें। लिक्विड डाइट जैसे दही, मट्ठा, जीरा वाली छाछ, जलजीरा, लस्सी, आमपना आदि पीते रहें। शराब और धूम्रपान से तौबा करें। बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी तरह की दवाएं न लें। ये शरीर में गर्मी बढ़ाती हैं। घर से बाहर निकलते समय स्कार्फ से चेहरा ढकें और आंखों को सूरज की तेज किरणों से बचाने के लिए सनग्लास पहनें।