देश के स्कूलों में बच्चों के भविष्य से 'गंदा' खिलवाड़ किया जा रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण है, टीचर्स की काबिलियत का ये चौंकाने वाला सच।
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dm in school
- फोटो : amarujala
हरियाणा बोर्ड के खराब रिजल्ट के बाद अधिकारियों के सरकारी स्कूलों का दौरा किया तो शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। हालत यह है कि 10वीं के विद्यार्थी भी यह बता नहीं पाए कि पानीपत की लड़ाई कब और किसके बीच हुई। विद्यार्थियों को प्रदेश के इतिहास की बेसिक जानकारी ही नहीं है। शुक्रवार को शिक्षा विभाग के एडिशनल डायरेक्टर वीरेंद्र दहिया ने गांधी कैंप के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का दौरा किया।
इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से सवाल-जवाब किए। दहिया अपने दौरे के दौरान 10वीं कक्षा में पहुंचे और छात्रों से अंग्रेजी-हिंदी व्याकरण और इतिहास के बारे में सामान्य सवाल पहुंचे। वीरेंद्र दहिया ने सबसे पहले छात्रों से अंग्रेजी व्याकरण के वर्तमान काल से संबंधित तीन सवाल पूछे। उन्होंने छात्रों को ‘वह जाता है और मुझे तैरना आता है’ को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करने के लिए कहा। बहुत कम विद्यार्थी इसका सही जवाब दे पाए।
इसके बाद डायरेक्टर ने पानीपत की पहली लड़ाई के बारे में दो सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि पानीपत की पहली लड़ाई कब हुई थी और किस-किस के बीच में हुई थी? इन दोनों सवालों का जवाब छात्र नहीं दे पाए। एक छात्र ने तर्क दिया कि ये तो हमारे सिलेबस का प्रश्न ही नहीं है। इतने आसान सवाल का भी छात्र जवाब नहीं दे पाए तो डायरेक्टर थोड़े मायूस हुए। तब छात्रों से इतिहास की शिक्षिका के बारे में पूछा।
डायरेक्टर ने हिंदी व्याकरण के सर्वनाम और संज्ञा के बारे में सवाल किया। इसका एक छात्र ने सही जवाब दिया। जय जवान-जय किसान का नारा किसने दिया था, एक करोड़ में कितने जीरो लगते हैं। ये वो प्रश्न हैं शुक्रवार को निरीक्षण में शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर हरचरण सिंह छोकर ने जिले के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करते हुए बच्चों और अध्यापकों से पूछे।