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कारगिल युद्ध में दुश्मन को धूल चटाने वाली तोप, सेना की ताकत और वीर जवानों का हुनर, देखिए
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 30 Nov 2018 12:02 PM IST
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इंडियन मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल
कारगिल युद्ध में दुश्मन देश पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाले तोप, सेना की ताकत और वीर जवानों का हुनर देखेंगे तो चौंक जाएंगे। दिलचस्प तस्वीरें...
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कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाने वाली बोफोर्स तोप को नजदीक से देखिए। आसमान में पैरा माउंटेन से सवारी के साथ-साथ अंग्रेजों और विंटेज कारों का दीदार किया जा सकता है। हॉर्स राइडिंग में घुड़सवारों के गजब के जौहर देखने को मिलेंगे। यह सब चंडीगढ़ सेक्टर-एक स्थित राजेद्रा पार्क में पंजाब सरकार की ओर से आयोजित मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल में देखने को मिलेगा। यहां सेना की ओर से बोफोर्स और टी-90 टैंक के बारे में जानकारी भी दी जा रही है।
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टी-90 टैंक से बरपता है कहर
टी-90 टैंक को राजस्थान में सबसे अधिक मारक क्षमता वाला टैंक माना जाता है। इसे रूस ने खासतौर पर भारत के लिए बनाया है। यह टैंक हाई टेक्नोलॉजी के साथ कंप्यूटर से जुड़ा है। इसे सेना में 2008 में शामिल किया गया। इसकी मारक क्षमता तकरीबन 5 किलोमीटर है, जबकि टारगेट सेट 2.5 किलोमीटर किया जाता है। सेना के एक जवान ने बताया कि इससे एक साथ दुश्मनों पर 4 वैपन से मार की जा सकती हैं। मिसाइल भी दागे सकते हैं। इसके साथ ही गन लांचर और एसजीएल केसाथ दुश्मन के बीच से निकलने के लिए चारों तरफ धुंधा फैलाया जा सकता हैं।
टी-90 टैंक को राजस्थान में सबसे अधिक मारक क्षमता वाला टैंक माना जाता है। इसे रूस ने खासतौर पर भारत के लिए बनाया है। यह टैंक हाई टेक्नोलॉजी के साथ कंप्यूटर से जुड़ा है। इसे सेना में 2008 में शामिल किया गया। इसकी मारक क्षमता तकरीबन 5 किलोमीटर है, जबकि टारगेट सेट 2.5 किलोमीटर किया जाता है। सेना के एक जवान ने बताया कि इससे एक साथ दुश्मनों पर 4 वैपन से मार की जा सकती हैं। मिसाइल भी दागे सकते हैं। इसके साथ ही गन लांचर और एसजीएल केसाथ दुश्मन के बीच से निकलने के लिए चारों तरफ धुंधा फैलाया जा सकता हैं।
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बोफोर्स तोप बना सेना के लिए तुरुप का एक्का
प्रदर्शनी में सेना के एक अधिकारी ने बताया कि बोफोर्स तोप ने कारगिल युद्ध में सेना केलिए तुरुप के एक्के का काम किया। जरूरत पड़ने पर इससे दुश्मनों पर रात के समय में भी गोले दागे जा सकते हैं। पहाड़ी इलाकों में इसकी मारक क्षमता काफी बढ़ जाती है। समतल इलाकों में बोफोर्स तोप की मारक क्षमता तकरीबन 30 किलोमीटर होती है, लेकिन जब इसका प्रयोग पहाड़ी इलाकों में किया जाता है तो मारक क्षमता 42 किलोमीटर हो जाती है। यह खुद ही घूमती है। इस तोप को चलाने के लिए 8 जवानों को लगाया जाता है, जिसमें सभी का अपना अलग-अलग काम होता है। इसका प्रयोग कारगिल युद्ध में सबसे अधिक किया गया।
प्रदर्शनी में सेना के एक अधिकारी ने बताया कि बोफोर्स तोप ने कारगिल युद्ध में सेना केलिए तुरुप के एक्के का काम किया। जरूरत पड़ने पर इससे दुश्मनों पर रात के समय में भी गोले दागे जा सकते हैं। पहाड़ी इलाकों में इसकी मारक क्षमता काफी बढ़ जाती है। समतल इलाकों में बोफोर्स तोप की मारक क्षमता तकरीबन 30 किलोमीटर होती है, लेकिन जब इसका प्रयोग पहाड़ी इलाकों में किया जाता है तो मारक क्षमता 42 किलोमीटर हो जाती है। यह खुद ही घूमती है। इस तोप को चलाने के लिए 8 जवानों को लगाया जाता है, जिसमें सभी का अपना अलग-अलग काम होता है। इसका प्रयोग कारगिल युद्ध में सबसे अधिक किया गया।
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विंटेज कारें कर रहीं आकर्षित
फेस्ट में विंटेज कारें डिस्पले के लिए रखी गई हैं। इनमें वर्षों पुरानी अंग्रेजों के जमाने की कारें भी शामिल हैं। इनमें फिएट पद्मिनी 1973 मॉडल, इंपाला 1958 मॉडल, बीटल 1968 मॉडल, हिंदुस्तान मोर्ट्स यूके 1948 मॉडल, ऑस्टिन 1962 मॉडल की कारें रखी गई है।
फेस्ट में विंटेज कारें डिस्पले के लिए रखी गई हैं। इनमें वर्षों पुरानी अंग्रेजों के जमाने की कारें भी शामिल हैं। इनमें फिएट पद्मिनी 1973 मॉडल, इंपाला 1958 मॉडल, बीटल 1968 मॉडल, हिंदुस्तान मोर्ट्स यूके 1948 मॉडल, ऑस्टिन 1962 मॉडल की कारें रखी गई है।