पंजाब में आतंक का खात्मा करने वाले केपीएस गिल की एक किताब ने देश भर में खूब बवाल किया। क्योंकि इसमें गोधरा कांड का ज़िक्र है। देखिए क्या था ये विवाद
पूर्व डीजीपी केपीएस गिल की किताब ‘दि पैरामाउंट कॉप’ ने देश भर में बवाल मचा दिया था। उनकी इस बुक में जहां पीएम नरिंदर मोदी को गोधरा कांड में क्लीन चिट दी गई थी वहीं सीएम प्रकाश सिंह बादल के लिए मुसीबत पैदा हो गई थी।
किताब के अनुसार आतंकवाद के दौर में बादल निरंतर केपीएस गिल के साथ बैठकें करते रहे। इस किताब को राहुल चंदन ने लिखा था। इसके बाद कई सिख संगठनों ने बादल को निशाने पर ले लिया और सवाल खड़े किए कि यह साफ किया जाए कि सीएम बादल गिल के साथ मीटिंग क्यों करते रहे।
गिल पर आरोप लगाए जाते रहे कि उन्होंने आतंकवाद के दौरान कई नाजायज और फर्जी मुठभेड़ कर सिख युवकों पर कहर बरपाया। बादल लंबे समय तक इन सवालों से बचते रहे। इस किताब के प्रकाशन के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से कई नेताओं ने अपील की कि वह बादल के इस पंथ विरोधी रवैये के लिए उनसे पंथ रत्न की उपाधि वापस लें।
5 of 7
केपीएस गिल दो बार बनें पंजाब पुलिस के मुखिया
- फोटो : Getty Images
सवाल खड़े होने लगे कि बादल ने आखिरकार दोहरा मापदंड क्यों अपनाया। एक तरफ वह मारे जाने वाले आतंकवादियों को भोग पर जाते थे वहीं उनको मार गिराने वाले गिल के साथ गुपचुप मीटिंग करते थे। गिल ने कहा था कि उनकी बादल के साथ सेक्टर-9 में कई बैठकें हुईं और इनमें पंजाब के हालात पर लंबी चर्चा होती रही।