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केपीएस गिल को क्यों कहा जाने लगा सुपरकॉप, यहां से जान लें वजह
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 27 May 2017 09:18 AM IST
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पंजाब में आतंक को जड़ से उखाड़ने वाले केपीएस गिल अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्हें सुपरकॉप क्यों कहा जाता था, वो वजह आप यहां से जान लें।
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गिल का जन्म पंजाब के लुधियाना में हुआ था। जन्म वर्ष को लेकर अस्पष्टता है। कहीं 1934 दर्ज है तो कहीं 1935। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत असम से की थी, लेकिन 90 के दशक में पंजाब के डीजीपी के रूप में सेवाएं देते हुए पूरे देश में प्रसिद्ध हुए। 1995 में वे भारतीय पुलिस सेवा से रिटायर हो गए थे।
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शुरुआती दिनों में ही उन्होंने खुद को एक सख्त अधिकारी के रूप में स्थापित कर लिया। पंजाब पुलिस के प्रमुख के रूप में 1990 के दशक में वह पूरे देश में प्रसिद्ध हुए थे। सिख बहुल राज्य पंजाब में अलगाववादी आंदोलन को कुचलने का मुख्य श्रेय गिल को ही मिला । पंजाब में मिली सफलता के बाद जहां अपराधियों के बीच उनके नाम से घबराहट फैलने लगी, वहीं मीडिया में वह ‘सुपरकॉप’ के रूप में चर्चित हुए।
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पंजाब में खालिस्तानी आंतकियों का खात्मा करने में गिल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। खालिस्तानी आतंकियों के सफाए के कारण ही उन्हें ‘सुपरकॉप’ के नाम से जाना जाता है। साल 1989 में प्रशासनिक सेवा के क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए गिल को भारत के चौथे सबसे बड़े सिविल सम्मान ‘पद्म श्री’ से नवाजा गया था।
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1985 में जब वे पंजाब आए थे तब राज्य में आतंकवाद चरम पर था। यहां अपने करीब 10 साल के टैन्याेर के दौरान वो आतंकवाद से लड़ते रहे। गिल के साथ काम कर चुके आईजी एके पांडे ने बताया कि डीजीपी केपीएस गिल ने कई आॅपरेशन चलाए। इनमें 1992-93 में आॅपरेशन नाइट डोमेनल, 1988 में आॅपरेशन ब्लैक थंडर और 1994 में आॅपरेशन एंटी हाईजैकिंग खास थे। इन तीनों आॅपरेशंस के दौरान उन्होंने बहुत बढ़िया काम किया।