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बेमिसालः कभी कूड़े से बीनते थे कागज, बेचकर भरते थे पेट, और आज मेयर बनकर दिया जवाब

Sun, 20 Jan 2019 09:07 AM IST
खुशबू गोयल अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 20 Jan 2019 09:07 AM IST
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Mayor Election 2019, 25th Mayor of Chandigarh Rajesh Kalia Success Story
मेयर राजेश कालिया
एक शख्स, जो कभी कूड़े से कागज बीनता था, बेचकर अपना और परिवार का पेट भरता था। उसी ने आज मेयर बनकर विरोधियों का ऐसा करार जवाब दिया कि उत्तर किसी के पास नहीं।
Mayor Election 2019, 25th Mayor of Chandigarh Rajesh Kalia Success Story
मेयर राजेश कालिया
कचरे के ढेर से कभी कागज बीनने वाले राजेश कालिया अब चंडीगढ़ के 25वें मेयर बन चुके हैं, लेकिन यह सफर इतना आसान नहीं रहा। गरीबों और अनुसूचित जाति के लिए संघर्ष करने वाले राजेश का शुरुआती जीवन गरीबी और अभावों में बीता। सात भाई-बहनों के साथ पालन-पोषण आसान नहीं था। ऐसे में बचपन में स्कूल के बाद वह अपने भाई-बहनों के साथ डड्डूमाजरा के डंपिंग ग्राउंड में कूड़े से कागज बीनते थे। यहां से मिलने वाले सामान को इकट्ठा कर उसे बेचते थे।
Mayor Election 2019, 25th Mayor of Chandigarh Rajesh Kalia Success Story
मेयर राजेश कालिया
इससे जो आय होती थी, उससे वह अपने परिवार का पेट पालते थे। राजेश कहते हैं कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था एक दिन वह उस कुर्सी को संभालेंगे, जिसके नीचे बैठकर कागज के टुकड़े बीनते थे। बचपन से ही राजनीति में रुझान होने के चलते कालिया धीरे-धीरे भाजपा नेताओं के संपर्क में आए और अब पार्टी के वफादार वर्कर बन गए। भाजपा की ओर से कालिया को पहले पार्षद और मेयर बनाकर इसका इनाम भी दिया गया।
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Mayor Election 2019, 25th Mayor of Chandigarh Rajesh Kalia Success Story
मेयर राजेश कालिया
राजेश का कहना है कि आज मैं जो कुछ भी हूं, यह सब भाजपा की देन है। बीजेपी ही एक ऐसी पार्टी है, जो चाय वाले को प्रधानमंत्री और कूड़ा बीनने वाले को मेयर बना सकती है। डड्डूमाजरा में रहने वाले राजेश कालिया के तीन भाई और तीन बहनें हैं। उनके पिता पंजाब सरकार से सेवादार के पद से रिटायर्ड हो चुके हैं। कालिया की तीन बेटियां हैं। डड्डूमाजरा में डंपिंग ग्राउंड आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अब देखना है कालिया मसले से कैसे निपटते हैं।
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Mayor Election 2019, 25th Mayor of Chandigarh Rajesh Kalia Success Story
मेयर राजेश कालिया
ऐसे मिली कालिया को मंजिल
कालिया भाजपा में एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। कालिया पिछले 30 साल से भाजपा और आरएसएस के साथ जुड़े हुए हैं। 2011 में हुए नगर निगम चुनाव में लड़ा लेकिन हार गए, लेकिन 2016 में वह एक बार पार्षद बने। कालिया ने डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था। पिछले नगर निगम चुनाव में कालिया ने मलोया से चुनाव लड़ा और वह चुनाव जीत गए। डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन की हड़ताल को समर्थन दिया था।
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