पंजाब के सुल्तानपुर लोधी के मंड इलाके को मिनी श्रीलंका के रूप में जाना जाता है। टापूनुमा इस इलाके में 16 गांव हैं। इन्हें देश-दुनिया से जुड़ने में 73 साल लग गए। देश की आजादी से पहले चली आ रही लोगों की लंबित मांग मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व स्थानीय विधायक नवतेज सिंह चीमा के प्रयासों से बुधवार को पूरी हुई।
73 साल बाद देश-दुनिया से जुड़ा पंजाब का 'मिनी श्रीलंका', ग्रामीण बोले- इन गांवों में रिश्ता तक नहीं करते थे लोग
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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने साल 2018 में श्री गुरु नानक देव जी के 549वें प्रकाश पर्व पर इस पुल का नींवपत्थर रखा था। जिसका उद्घाटन बुधवार को सुल्तानपुर लोधी के विधायक नवतेज सिंह चीमा ने किया। 11.19 करोड़ की लागत से तैयार 180 मीटर लंबा पुल शुरू होने से 16 गांवों के 7000 लोगों ने दशकों पुरानी मांग पूरी होने से राहत की सांस ली है।
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विधायक चीमा ने कहा कि जब पुल का नींव पत्थर रखा गया था तो लोगों को यकीन नहीं था कि यह पुल तैयार भी होगा, क्योंकि साल 2011 के बाद अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में अलग-अलग पुलों के दो-दो बार नींव पत्थर रखे गए। परंतु काम शुरू न हुआ लेकिन कांग्रेस सरकार ने इस पुल को रिकॉर्ड समय में बनाकर जनता को समर्पित किया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का धन्यवाद करते हुए कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से गुरपर्व पर शुरू सभी प्रोजेक्ट पूरे हो गए हैं। इससे सुल्तानपुर लोधी पर्यटन के तौर पर विश्व पटल पर आ गया है। वहीं गांवों का स्वरूप भी बदल रहा है। उन्होंने बताया कि इस स्थायी पुल से पहले ‘बाऊपुर टापू’ के गांव बाऊपुर जदीद, बाऊपुर कदीम, संगाड़ा, मंग मुबारकपुर, रामपुर गौड़ा, भैनी कादर बख्स, मंड संगाड़ा, किशनपुर गटका, मुहम्मदाबाद, भैनी बहादुर, मंड ढूंडा, मंड भीम जदीद, गांव आलम खानवाला व अन्य गांव प्लाटून पुल से जुड़े थे।
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इस अस्थायी पुल को हर साल बरसात से पहले तीन माह के लिए खोल दिया जाता है, जिससे इन गांवों के लोगों को किश्ती के सहारे जिंदगी बितानी पड़ती थी लेकिन अब यह समस्या हमेशा के लिए दूर हो गई है। इन गांवों के लोगों ने बताया कि वह सामाजिक तौर पर कई परेशानियों का सामना करते थे और हालात इतने बुरे हो गए थे कि कोई उनके गांवों में रिश्ता तक नहीं करता था। इसके इलावा बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य सेवाओं और किसानों को फसल मंडी तक ले जाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।