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ये कैसी पाठशाला, गलन भरी ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं मासूम, टूटी छतें बेंच नदारद

Sat, 11 Jan 2020 11:24 AM IST
खुशबू गोयल अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 11 Jan 2020 11:24 AM IST
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Punjab Government Schools Ground Report, Education Department
नीचे बैठकर पढ़ाई करते स्कूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला
तस्वीरों में देखिए एक पाठशाला, जहां बच्चे गलन भरी ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। जबकि इन स्कूलों को स्मार्ट बनाने के नाम पर शिक्षा विभाग को इनाम मिलने जा रहा है। 
Punjab Government Schools Ground Report, Education Department
नीचे बैठकर पढ़ाई करते स्कूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला
ये तस्वीरें पंजाब के फिरोजपुर जिले के गांव अलीके में बना सरकारी प्राइमरी स्कूल की हैं। स्कूल की इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि एक निर्माणाधीन घर की इमारत और गुरुद्वारे में विद्यार्थियों की कक्षाएं लग रही थीं। कुछ दिनों से गुरुद्वारे में भी मरम्मत का काम चल रहा है, जिस कारण बच्चों को जर्जर स्कूल की इमारत में ही लौटना पड़ा। अब 349 बच्चे ठिठुरन वाली ठंड में टाट पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
Punjab Government Schools Ground Report, Education Department
नीचे बैठकर पढ़ाई करते स्कूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला
फिरोजपुर जिले में ऐसे सैकड़ों स्कूल हैं, लेकिन शिक्षा विभाग सरकारी प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट बनाने के नाम पर 11 जनवरी को दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने जा रहा है। गांव अलीके के स्कूल में 349 बच्चों के लिए चार कमरे हैं और 60 बैंच हैं। इनमें से तीस बैंच टूटे हैं। इतने बैंचों पर सिर्फ 120 बच्चे ही बैठकर पढ़ सकते हैं। कमरों की छतें जर्जर हैं, लेकिन रंग-रोगन कर इन्हें चमका दिया गया है।
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Punjab Government Schools Ground Report, Education Department
नीचे बैठकर पढ़ाई करते स्कूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला
बारिश में छत से पानी रिसता है और क्लास रूम भर जाता है। एक कक्षा में 50 से अधिक बच्चे हैं, जबकि 30 होने चाहिएं। सुबह 10.33 बजे स्कूल पहुंचे तो बच्चे जमीन पर बैठे ठिठुर रहे थे। इसके बाद एक निर्माणाधीन घर में पहुंचे, जहां इसी स्कूल के बच्चों की कक्षाएं छत पर लगी हुई थीं। ग्रामीण सुरजीत सिंह और मंगल सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले स्कूल गांव के गुरुद्वारे में लग रहा था।
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Punjab Government Schools Ground Report, Education Department
जर्जर हालत में कमरे की दीवारें - फोटो : अमर उजाला
वहीं शिक्षकों का कहना है कि स्मार्ट स्कूल का मतलब स्कूल के सभी कमरों में ई-कंटेंट (स्क्रीन प्रोजेक्ट), दीवारों पर अच्छी तस्वीरें, इंग्लिश मीडियम, बच्चे टाइ-बेल्ट बांधकर आएं, शुद्ध पीने का पानी, फर्नीचर, मजबूत कमरों के अलावा अन्य और चीजें हैं। जो स्कूल इन सभी जरूरतों को पूरी करता हो, उसे स्मार्ट स्कूल कहते हैं। पंजाब के सरकारी स्कूलों में तो स्टाफ ही पूरा नहीं है, उपरोक्त सुविधाएं तो दूर की बात हैं।
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