पंजाब में आतंक को पूरी तरह साफ करने के बाद केपीएस गिल सुर्खियों में आ गए थे। उनकी जरुरत श्रीलंका तक को पड़ गई थी। श्रीलंका एक ऑपरेशन चलाने की सोच रहा था, देखिए फिर क्या हुआ
खुशहाल पंजाब को आतंकवाद के काले दौर से उबारने वाले केपीएस गिल की जुदा कार्यशैली ही उनकी पहचान बनी। पंजाब पुलिस के अधिकारी आज भी उस कार्यशैली के मुरीद हैं। गिल ने पंजाब और केंद्र सरकार से आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सभी तरह के अधिकार लिए।
आतंकवाद पर पूरी पड़ताल कर गिल को स्टडी में जब उन्हें यह पता चला कि पंजाब में खालिस्तानी अभियान और आतंकी गतिविधियों में 90 प्रतिशत पंजाबी युवा शामिल हैं तो उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी मुहिम छेड़ डाली। गिल ने इस मुहिम के दौरान आतंकी गतिविधियों में लिप्त पंजाबी युवाओं को मुख्यधारा में लाने और आतंकवाद का सफाया करने के लिए पंजाबी युवाओं का ही इस्तेमाल किया।
गिल ने कई बार आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में सेना के सहयोग के लिए भी पंजाबी युवाओं को तैनात किया। केपीएस गिल के कार्यकाल में पंजाब के सैकड़ों की संख्या में एनकाउंटर हुए। इस बीच कई मानवाधिकार संगठनों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया, लेकिन गिल का यह फार्मूला इतना कारगर साबित हुआ की पंजाब से एक दशक पुराने आतंकवाद का सफाया हो गया।
वर्ष 2000 से 2004 के बीच श्रीलंका की तत्कालीन सरकार ने लिब्रेशन ऑफ तमिल टाइगर्स ईलम (एलटीटीई) के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए भी गिल की मदद मांगी थी। वर्ष 2006 में छत्तीसगढ़ राज्य ने गिल को नक्सलियों पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया था। छत्तीसगढ़ में गिल कुछ ही समय तक काम कर पाए थे की उन्हें पद से हटना पड़ गया।