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आजादी के एक साल बाद 1948 में हुआ था लंदन ओलंपिक, पढ़ें- इंग्लैंड को घुटनों पर लाने वाले बलबीर सिंह की कहानी

Tue, 26 May 2020 01:25 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 26 May 2020 01:25 PM IST
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Story of Hockey legend and triple olympic gold medallist Balbir singh senior
बलबीर सिंह सीनियर (फाइल फोटो) - फोटो : ट्विटर

दुनिया में अपनी हॉकी का लोहा मनवा चुके सरदार बलबीर सिंह भले ही इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं लेकिन खेल प्रशंसकों के दिलों में वह हमेशा अपनी जगह बनाए रखेंगे। पदमश्री बलबीर सिंह भारत के इकलौते ऐसे खिलाड़ी थे, जोकि तीन बार ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता टीम के सदस्य रहे थे। बलबीर सिंह का जन्म 10 अक्टूबर 1924, हरिपुर खालसा में हुआ। इनके पिता दलीप सिंह दोसांज स्वतंत्रता सैनानी थे। पत्नी स्वर्गीय सुशील कौर लाहौर की थीं।

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बलबीर सिंह सीनियर ने अपनी पढ़ाई देव समाज हाई स्कूल मोगा, डीएम कॉलेज मोगा, नेशनल कॉलेज लाहौर, खालसा कॉलेज अमृतसर से की। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे से पहले लाहौर मे पंजाब यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और हॉकी टीम का नेतृत्व किया। भारत ने हॉकी में ओलंपिक लंदन (1948), हेल्सिंकी (1952) और मेलबोर्न (1956) में गोल्ड मेडल जीता था, खास बात यह है कि इन तीनों टीमों में बलबीर सिंह सीनियर मेडल विजेता टीम के हिस्सा थे। साल 1948 के लंदन ओलंपिक में अर्जेंनटीना के खिलाफ उन्होंने 6 गोल दागे थे, इस मैच में भारत 9-1 से जीता था। इसी ओलंपिक के फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 4-0 से हराया था, इस मैच में उन्होंने पहले 15 मिनट में दो गोल कर दिए थे। 

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हेल्सिंकी ओलंपिक के फाइनल मैच में उन्होंने हॉलैंड के खिलाफ फाइनल मैच 5 गोल दागे थे। जिसका रिकॉर्ड आज भी गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है। साल 1954 में सिंगापुर टूर पर गई टीम इंडिया ने कुल 121 गोल किए थे, जिसमें 84 गोल अकेले बलबीर सिंह सीनियर के थे। साल 1955 में न्यूजीलैंड -ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया ने 203 गोल किए, जिसमें 121 गोल बलबीर सिंह सीनियर के थे, यह वह दौर था, जब वर्ल्ड मीडिया ने उनके नाम के साथ गोल मशीन लगाना शुरू कर दिया था। 

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हॉकी विजेता टीम के रहे चीफ कोच
ओलंपिक - लंदन 1948 ( बतौर खिलाड़ी), हेल्सिंकी 1952 (बतौर वाइस कैप्टन) और मेलबर्न 1956 बतौर कैप्टन गोल्ड मेडल विजेता टीम के सदस्य। एशियन गेम्स - साल 1958 में सिल्वर मेडल विजेता टीम के सदस्य। साल 1971 मेंस वर्ल्ड कप की ब्रांज मेडल विजेता टीम के कोच, साल 1975 में भारत वर्ल्ड कप हॉकी विजेता टीम के चीफ कोच व मैनेजर।

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यह मिले थे अवॉर्ड 
साल 1957 में पदमश्री पाने वाले पहले भारतीय। साल 2006 में बेस्ट सिख खिलाड़ी का अवॉर्ड, लंदन ओलंपिक 2012 में उन्हें सदी के बेहतरीन खिलाड़ियों में चयनित किया गया। यह सम्मान पाने वाले वह एशिया में इकलौते खिलाड़ी थे। साल 2015 में उन्हें मेजर ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला। साल 2019 महाराजा रणजीत सिंह खेल अवार्ड। बलबीर सिंह सीनियर ने हॉकी के विषय पर दो किताबें भी लिखी थी। इनमें गोल्डन हैट्रिक और दूसरी द गोल्डन यार्ड स्टिक शामिल हैं।  

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