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देखिए, पाकिस्तान से ये शख्स लेकर आया था कटी हुई लाशों से भरी ट्रेन

Sun, 16 Apr 2017 09:44 AM IST
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब) Updated Sun, 16 Apr 2017 09:44 AM IST
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The man Run Train full of Dead Bodies from Pakistan during partition on hussainiwala
1947 का गदर
1947 का गदर वो खौफनाक मंजर था, जिसे भूलना भी चाहो तो मुमकिन नहीं। जानिए उस शख्स के बारे में जो पाकिस्तान से कटी लाखों से भरी ट्रेन लेकर आया था।
The man Run Train full of Dead Bodies from Pakistan during partition on hussainiwala
1947 का गदर
13 अप्रैल को बैसाखी के मेले में अंतरराष्ट्रीय ऐतिहासिक रेल मार्ग पर दौड़ती ट्रेन को देख बुजुर्ग बाल कृष्ण गुप्ता व सोहन सिंह की गदर की याद ताजा हो गई। वह बताते हैं कि यहीं से ट्रेन पाकिस्तान जाया करती थी और सन 1947 में दोनों देशों के बंटवारे के बाद बिगड़े हालात के दौरान दोनों देशों के कई लोग मरे थे।
The man Run Train full of Dead Bodies from Pakistan during partition on hussainiwala
हुसैनीवाला बॉर्डर
रेलवे से सेवानिवृत हुए चीफ कंट्रोलर बाल कृष्ण गुप्ता ने बताया कि दोनों देशों का जब बंटवारा हुआ था उस समय वो रेलवे में गार्ड थे। वही पाकिस्तान से इसी रेलमार्ग से लाशों से भरी ट्रेन हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन से होती हुई फिरोजपुर के छावनी रेलवे स्टेशन पहुंची थी।
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The man Run Train full of Dead Bodies from Pakistan during partition on hussainiwala
हुसैनीवाला बॉर्डर
बाल कृष्ण गुप्ता ने बताते हैं कि उन्हें रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने आदेश दिया था कि पाकिस्तान के गंडा सिंह रेलवे स्टेशन पर भारतीय लोग फिरोजपुर आने का इंतजार कर रहे हैं। यह कहते हुए उन्हें ट्रेन लेकर पाकिस्तान भेजा गया, जब ट्रेन से भारतीयों को लेकर हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए तो रास्ते में पाकिस्तान के कुछ शरारती तत्वों ने उनपर हमला बोल दिया। ट्रेन में कई लोगों को तेजधार हथियार से काट दिया गया।
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The man Run Train full of Dead Bodies from Pakistan during partition on hussainiwala
हुसैनीवाला बॉर्डर
ट्रेन खून से लथपथ थी। किसी तरह कुछ लोगों को बचाकर फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन पहुंचे। जब भी उन्हें ये दिन याद आता है उनकी आंखों से आंसू छलक उठते हैं। बुजुर्ग किसान सोहन सिंह ने बताया कि सन 1947 के गदर में इसी ट्रैक पर दौड़ने वाली ट्रेन पर पाकिस्तान की तरफ से कटी हुई लाशें भारत आई थी। ट्रेन तो खून से लथपथ थी ही इस ट्रैक पर भी लोगों का खून बहा है। इसलिए यह ऐतिहासिक ट्रैक है।
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