भारतीय टीम में जगह बनाने को लेकर काफी प्रतिस्पर्धा रही है। टीम में जगह बनाने के बावजूद खिलाड़ियों को लगातार टीम में बने रहने के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करना होता है। कई क्रिकेटर रहे हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, घरेलू क्रिकेट और ए टूर में अच्छा प्रदर्शन किया। टीम में जगह को लेकर इतनी प्रतिस्पर्धा की वजह से खिलाड़ियों को जब भी राष्ट्रीय टीम में मौका मिलता है तो उनपर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने का दबाव भी होता है। कई खिलाड़ी मैच जिताऊ प्रदर्शन करने के बाद भी टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाते हैं। आइए जानते हैं उन तीन खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने अपने आखिरी मैच में 'मैन ऑफ द मैच' का पुरस्कार जीता, लेकिन फिर भी उन्हें अगले मैच के लिए नहीं चुना गया।
तीन भारतीय खिलाड़ी जो अपने आखिरी मुकाबले में 'मैन ऑफ द मैच' बने, लेकिन फिर कभी मौका नहीं मिला
प्रज्ञान ओझा
प्रज्ञान ओझा भारत के लिए काफी समय तक मुख्य स्पिनर हुआ करते थे। उन्होंने 24 टेस्ट में 30.27 की औसत से 113 विकेट लिए और इस दौरान उन्होंने सात बार पांच विकेट भी चटकाए। ओझा ने भारत के लिए 18 वन-डे और छह टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले हैं। उन्होंने अपने 24 टेस्ट मैचों में से 20 टेस्ट घरेलू जमीन पर खेला और 101 विकेट लिए।
उन्होंने 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट में दस विकेट लिए थे। टेस्ट में दस विकेट लेने के बावजूद बाएं हाथ के स्पिनर ओझा करीब सात साल तक भारतीय टीम में अपनी जगह नहीं बना सके और उसके बाद फरवरी 2020 में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने की घोषणा की। शानदार प्रदर्शन के बावजूद ओझा को टीम में नहीं चुना गया और वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला गया टेस्ट उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच था।
अमित मिश्रा
लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने वर्ष 2003 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वन-डे डेब्यू किया था। वन-डे डेब्यू के सात साल बाद अमित मिश्रा को 2010 में अपना टेस्ट पदार्पण करने का मौका मिला और 2013 में टी-20 अंतरराष्ट्रीय में डेब्यू किया। उन्हें कभी भी किसी भी प्रारूप में लगातार मौके नहीं मिले। उन्होंने अपने करियर में 76 टेस्ट विकेट, 64 वन-डे और 16 टी-20 अंतरराष्ट्रीय विकेट चटकाए हैं।
अमित मिश्रा ने 2016 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी आखिरी वन-डे सीरीज खेली थी और उस सीरीज में 14.33 के औसत से 15 विकेट अपने नाम किए थे। उस सीरीज के आखिरी वन-डे में मिश्रा ने 18 रन देकर पांच विकेट लिए और भारत को सीरीज में जीत दिलाई। मिश्रा को पूरी सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन की वजह से मैन ऑफ द सीरीज और आखिरी मैच में मैन ऑफ द मैच चुना गया। इसके बाद मिश्रा को दोबारा कभी भारतीय टीम में जगह नहीं मिली।
इरफान पठान
35 वर्षीय ऑलराउंडर इरफान पठान ने 29 टेस्ट, 120 वन-डे और 24 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत के लिए खेला है। 2007 में दक्षिण अफ्रीका में टी-20 विश्व कप जीतने वाली टीम इंडिया के पठान अहम हिस्सा थे। इरफान ने 2012 में श्रीलंका के खिलाफ अपना आखिरी वन-डे मैच खेला था।
अपने आखिरी वन-डे मैच में पठान ने 29 रन बनाए थे और पांच विकेट भी चटकाए थे। इस प्रदर्शन की वजह से उन्हें मैन ऑफ द मैच भी मिला, लेकिन इसके बाद इरफान को इस प्रारूप में दोबारा कभी खेलने का मौका नहीं मिला।