भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी में खेला गया सीरीज का तीसरा टेस्ट मैच ड्रॉ के साथ खत्म हुआ। एक समय जीत की दावेदार मानी जा रही ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों ने शानदार खेल दिखाया। आखिरी दिन की शुरुआत में कप्तान रहाणे का विकेट निकालने के बाद ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज जूझते नजर आए। टीम इंडिया के मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने मेजबान टीम को विकेट के लिए पूरे दिन तरसाया और हारे हुए मैच को बचाने में कामयाब रहे। ऐसे में आइए नजर डालते हैं उन पांच खिलाड़ियों पर जिनकी वजह से भारत मैच बचाने में कामयाब रहा।
वो पांच भारतीय जांबाज, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के मुंह से छीनी जीत, हारे हुए मैच को किया ड्रॉ
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ऋषभ पंत:
पहली पारी में बल्लेबाजी करते हुए चोटिल हुए ऋषभ पंत ने चोट के बावजूद दूसरी पारी में बल्लेबाजी की। उन्हें आखिरी दिन बल्लेबाजी क्रम में भी ऊपर भेजा गया। पंत ने भी इस फैसले को सही ठहराया। उन्होंने तेजी से रन बनाए और ऑस्ट्रेलियाई टीम पर दबाव बनाया। पंत ने 118 गेंदों में 97 रन बनाए। इसके साथ ही उन्होंने पुजारा के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 148 रनों की साझेदारी की।
चेतेश्वर पुजारा:
टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने दोनों पारियों में महत्वपूर्ण अर्धशतकीय पारियां खेली। उन्होंने पहली पारी में जहां 176 गेंदों में 50 रन बनाए तो वहीं दूसरी पारी में 205 गेंदों में 77 रन बनाए। पुजारा काफी हद तक टीम का एक छोर बचाए रखने में सफल रहे।
रविचंद्रन अश्विन:
टीम के गेंदबाजी ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन ने एक बार फिर से प्रभावित किया। चोटिल जडेजा की गैरमौजूदगी में उन्होंने पहले गेंद और फिर बल्ले से भी अहम योगदान दिया। दूसरी पारी में स्मिथ और वार्नर का विकेट चटकाने के साथ ही उन्होंने बल्लेबाजी में 128 गेंदों का सामना किया और 39 रन बनाकर नाबाद रहे।
हनुमा विहारी:
टीम के 27 वर्षीय बल्लेबाजी ऑलराउंडर हनुमा विहारी अपनी फॉर्म को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे थे लेकिन दूसरी पारी में आखिरी दिन उन्होंने अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया। पुजारा और पंत के आउट होने के बाद विहारी ने एक छोर को पकड़ा और मुश्किल में फंसी टीम को उबारते हुए मैच ड्रॉ करवा गए। मांशपेशियों में खिंचाव के बावजूद उन्होंने यहां 161 गेंदों का सामना किया और 23 रन बनाकर नाबाद रहे। विहारी ने अश्विन के साथ मिलकर छठे विकेट के लिए 258 गेंदों में 62 रनों की साझेदारी की।