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..तो क्या बदलने वाला है BCCI का संविधान, सौरव गांगुली दोबारा संभालेंगे बोर्ड की कमान?

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rohit Ojha Updated Sun, 10 Nov 2019 10:19 AM IST
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BCCI AGM proposes comprehensive changes in constitution
Sourav Ganguly-Jay Shah - फोटो : सोशल मीडिया

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की सालाना आम बैठक बोर्ड के मुख्यालय मुंबई में एक दिसंबर को होगी। अध्यक्ष सौरभ गांगुली के नेतृत्व वाले नए अधिकारियों ने सभी राज्य संघों को इस बारे में सूचित कर दिया है। गांगुली की अध्यक्षता वाली बैठक में मुख्य पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है। बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार आम बैठक एक दिसंबर को होनी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह माना जा रहा है कि बोर्ड के संविधान में बदलाव को लेकर इस आम बैठक में चर्चा हो सकती है।

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BCCI AGM proposes comprehensive changes in constitution
अपनी नई टीम के साथ सौरव गांगुली - फोटो : ट्विटर

जिन बिंदुओं पर बैठक के दौरान चर्चा होगी और उसमें बदलाव भी किया जा सकता है, उनमें से सबसे बड़ा मुद्दा होगा कूलिंग ऑफ पीरियड। बीसीसीआई के हालिया नियम के मुताबिक कूलिंग ऑफ पीरियड के तहत वह अधिकारी जो बीसीसीआई या उसके सदस्य संघ में छह साल तक रहा हो वह छह साल बाद कूलिंग ऑफ पीरियड में चला जाएगा। यह नियम कई प्रतिभाशाली लोगों को चुनने में बाधा साबित हो रहा है। जिसको बदलने के लिए चर्चा हो सकती है।

मालूम हो कि अभी कुछ दिन पहले ही सौरव गांगुली बीसीसीआई के नए अध्यक्ष बने हैं, और उनका कार्यकाल मात्र 10 महीने का है, क्योंकि वह इससे पहले पांच साल अधिक समय तक बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के विभिन्न पदों पर रह चुके हैं। अगर इस बैठक में कूलिंग ऑफ पीरियड के नियम को बदलने की सहमती बनी और सुप्रीम कोर्ट से मान्य करार दे देता है, तो गांगुली एक बार फिर से बोर्ड की कमान संभाल सकते हैं।

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BCCI AGM proposes comprehensive changes in constitution
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बैठक में अधिकारी बीसीसीआई के संविधान के कुछ बिंदुओं को देखेंगे जिन पर दोबारा काम किया जाएगा और संभव हो तो उनमें बदलाव भी किया जा सकता है, क्योंकि अधिकारियों को लगता है कि कुछ ऐसी चीजें हैं जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूर लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मुताबिक नहीं हैं। बैठक में जिस पहले बिंदू को बदलने पर चर्चा हो सकती है वह है हर बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के पास जाना है। अधिकारियों को लगता है कि यह संभव नहीं है।

BCCI AGM proposes comprehensive changes in constitution
BCCI

प्रस्ताव में लिखा है कि बीसीसीआई के संविधान में यह उपलब्धता है कि किसी भी तरह के बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी की जरूरत होगी। यह लोढ़ा समिति की सिफारिशों में नहीं था। यह सुप्रीम कोर्ट के 18 जुलाई 2016 के फैसले में भी नहीं था। इससे अधिकारियों के सही बदलाव करने के अधिकार को लागू करने के लिए उसे हर बार सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी लेनी होगी।

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ICC - फोटो : social Media

अगला मुख्य चर्चा का विषय सदस्यों की अयोग्यता का है। अधिकारियों को लगता है कि मौजूदा स्थिति में अनुभव की कमी होना बड़ा मुद्दा है, खासकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) में बीसीसीआई के प्रतिनिधित्व को लेकर।

प्रस्ताव में लिखा है कि अयोग्यता का नियम बहुत बड़ा है। अगर कोई इंसान बिना ज्यादा अनुभव के बीसीसीआई का प्रतिनिधित्व आईसीसी में करता है तो इंटरनेशल स्तर पर भारत के योगदान को ज्यादा पहचान नहीं मिलेगी। इसलिए बीसीसीआई के हितों को बचाते हुए यह जरूरी है कि आईसीसी में अपनी बात को साफ रखने के लिए अनुभवी लोग हों। 

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