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पिछले एक दशक में फीके रहे स्पिनर्स, 'SENA’ देशों में पेसर्स के आगे कहीं नहीं टिकता खेल
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अंशुल तलमले
Updated Sat, 11 Jul 2020 04:58 PM IST
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मौजूदा दौर के दिग्गज स्पिनर्स
- फोटो : सोशल मीडिया
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अगर आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले दशक में ‘SENA’ (साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) देशों में स्पिनरों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। ऐसे में किसी भी कप्तान के लिए ऐसी परिस्थितियों में धीमी गति के दो गेंदबाजों को रखना परेशानी का सबब बन सकता है। पिछले एक दशक (एक जनवरी 2010 से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक) के आंकड़े बताते हैं कि इन देशों में तेज गेंदबाजों की ही तूती बोली है।
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डे नाइट टेस्ट मैच
- फोटो : ट्विटर
पिछले एक दशक में स्पिनरों ने क्रिकेट खेलने वाली सभी देशों में कुल मिलाकर प्रति टेस्ट 12.03 विकेट लिए, लेकिन जहां तक ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड की बात है तो इन देशों में यह आंकड़ा प्रति टेस्ट 6.4 रह जाता है।
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अनिल कुंबले, बिशन सिंह बेदी और रविचंद्रन अश्विन
- फोटो : ट्विटर
दूसरी तरफ तेज गेंदबाजों ने ओवरऑल जहां प्रति टेस्ट 19.20 विकेट लिए, वहीं ‘SENA’ देशों में उन्हें प्रत्येक टेस्ट में औसतन 24.87 विकेट मिले। गौर करने की बात यह है कि 2000 के दशक में स्पिनरों ने कुल मिलाकर प्रति टेस्ट 9.79 विकेट हासिल किए थे और ‘SENA’ देशों में उनका आंकड़ा 6.8 था। स्वाभाविक है इन चार देशों में स्पिनरों के प्रदर्शन में गिरावट आई है।
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डे-नाइट टेस्ट मैच
- फोटो : ट्विटर
यही नहीं, 2010 के दशक में स्पिनरों ने ‘SENA’ देशों में केवल 40 बार पारी में पांच या इससे अधिक विकेट और पांच बार मैच में दस या इससे अधिक विकेट लिए जबकि इस बीच इस मामले में ओवरऑल आंकड़ा 250 और 47 रहा। इससे पहले के दशक में हालांकि स्पिनरों ने ‘SENA’ देशों में 69 बार पांच या अधिक विकेट तथा 13 बार दस या अधिक विकेट हासिल किए थे, जिसकी ओवरऑल आंकड़े (228 और 51) में कुछ जीवंत उपस्थिति नजर आती है।
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70 के दशक में भारतीय स्पिनर आक्रमण के अगुवा रहे बिशन सिंह बेदी
- फोटो : सोशल मीडिया
SENA देशों में स्पिनरों का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1970 के दशक में रहा था जब उन्होंने प्रति टेस्ट 8.23 विकेट लिए थे लेकिन अस्सी के दशक में यह आंकड़ा 6.02 और नब्बे के दशक में 6.5 रह गया था। सत्तर के दशक में स्पिनरों का क्रिकेट खेलने वाले सभी देशों में आंकड़ा 10.44 विकेट प्रति टेस्ट था। उसके बाद 2010 के दशक में ही यह आंकड़ा दोहरे अंक में पहुंच पाया।
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