IPL 2026: रियान पराग मामले में नया बवाल, अब महिला संगठन ने जांच की मांग की; ड्रेसिंग रूम में कर रहे थे वेपिंग
रियान पराग के कथित वेपिंग वीडियो पर विवाद गहरा गया है। बीसीसीआई ने जुर्माना लगाया, लेकिन ‘मदर्स अगेंस्ट वेपिंग’ संगठन ने जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह घटना युवाओं पर गलत असर डाल सकती है और कानून के उल्लंघन की जांच जरूरी है।
विस्तार
यह घटना 28 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच खेले गए मुकाबले के दौरान हुई। लाइव प्रसारण में कैद हुए एक वीडियो में रियान पराग ड्रेसिंग रूम में वेप जैसे डिवाइस का इस्तेमाल करते हुए नजर आए। इस पर कार्रवाई करते हुए बीसीसीआई ने आईपीएल आचार संहिता के लेवल-1 उल्लंघन के तहत उन पर 25 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया और एक डिमेरिट पॉइंट भी दिया।
Captain of Rajasthan Royals team Riyan Parag enjoying vape in the RR dressing room .
— Surbhi (@SurrbhiM) April 29, 2026
Vaping is illegal in India . Hello @BCCI is this allowed?
#PBKSvsRR pic.twitter.com/banIgJDO6u
'मदर्स अगेंस्ट वेपिंग' नाम के महिला समूह ने इस घटना को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पूरी तरह प्रतिबंधित हैं, ऐसे में इस तरह का दृश्य गलत संदेश देता है। संगठन ने अपने बयान में कहा, 'भारत में कानून सबसे ऊपर है। चाहे कोई सेलिब्रिटी हो या आम नागरिक, सभी पर समान नियम लागू होने चाहिए।'
संगठन ने 'इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम 2019' का हवाला देते हुए कहा कि ई-सिगरेट का उत्पादन, बिक्री, भंडारण और उपयोग तक प्रतिबंधित है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'कानून के अनुसार उल्लंघन करने पर छह महीने तक की सजा या 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। गंभीर मामलों में एक साल की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।'
महिला समूह ने चिंता जताई कि राष्ट्रीय टीवी पर ऐसे दृश्य दिखना लाखों युवाओं पर गलत प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने कहा, 'हमारे बच्चे सिर्फ सेलिब्रिटीज को देखते ही नहीं, बल्कि उन्हें कॉपी भी करते हैं। इसलिए इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।'
संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह सिर्फ गलती थी या किसी प्रतिबंधित उत्पाद को सामान्य बनाने की कोशिश। उन्होंने कहा, 'यह जानना जरूरी है कि यह जानबूझकर कानून का उल्लंघन था, लापरवाही थी या किसी तरह की पब्लिसिटी का हिस्सा।' संगठन ने यह भी कहा कि अगर पराग की कोई गलत मंशा नहीं थी, तो उन्हें खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और जांच में सहयोग करना चाहिए।
महिला समूह ने बीसीसीआई से 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि क्रिकेट जैसे बड़े मंच पर इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि साफ संदेश जाए कि कानून और बच्चों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है।
