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IPL 2026: रियान पराग मामले में नया बवाल, अब महिला संगठन ने जांच की मांग की; ड्रेसिंग रूम में कर रहे थे वेपिंग

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Swapnil Shashank Updated Thu, 30 Apr 2026 04:05 PM IST
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सार

रियान पराग के कथित वेपिंग वीडियो पर विवाद गहरा गया है। बीसीसीआई ने जुर्माना लगाया, लेकिन ‘मदर्स अगेंस्ट वेपिंग’ संगठन ने जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह घटना युवाओं पर गलत असर डाल सकती है और कानून के उल्लंघन की जांच जरूरी है।

IPL 2026: Riyan Parag Faces Fresh Controversy as Women’s Group Seeks Probe Over Vaping Video
रियान पराग - फोटो : IPL/BCCI/ANI
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विस्तार

राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग एक नए विवाद में घिर गए हैं। आईपीएल 2026 के एक मैच के दौरान कथित तौर पर वेपिंग करते हुए उनका वीडियो सामने आने के बाद एक महिला संगठन ने इसकी जांच की मांग की है। हालांकि, बीसीसीआई ने उन्हें मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाकर फिलहाल बैन से राहत दे दी है, लेकिन मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
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क्या है पूरा मामला?
यह घटना 28 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच खेले गए मुकाबले के दौरान हुई। लाइव प्रसारण में कैद हुए एक वीडियो में रियान पराग ड्रेसिंग रूम में वेप जैसे डिवाइस का इस्तेमाल करते हुए नजर आए। इस पर कार्रवाई करते हुए बीसीसीआई ने आईपीएल आचार संहिता के लेवल-1 उल्लंघन के तहत उन पर 25 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया और एक डिमेरिट पॉइंट भी दिया।

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महिला संगठन की सख्त मांग
'मदर्स अगेंस्ट वेपिंग' नाम के महिला समूह ने इस घटना को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पूरी तरह प्रतिबंधित हैं, ऐसे में इस तरह का दृश्य गलत संदेश देता है। संगठन ने अपने बयान में कहा, 'भारत में कानून सबसे ऊपर है। चाहे कोई सेलिब्रिटी हो या आम नागरिक, सभी पर समान नियम लागू होने चाहिए।'

कानून का हवाला
संगठन ने 'इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम 2019' का हवाला देते हुए कहा कि ई-सिगरेट का उत्पादन, बिक्री, भंडारण और उपयोग तक प्रतिबंधित है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'कानून के अनुसार उल्लंघन करने पर छह महीने तक की सजा या 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। गंभीर मामलों में एक साल की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।'

युवाओं पर पड़ सकता है असर
महिला समूह ने चिंता जताई कि राष्ट्रीय टीवी पर ऐसे दृश्य दिखना लाखों युवाओं पर गलत प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने कहा, 'हमारे बच्चे सिर्फ सेलिब्रिटीज को देखते ही नहीं, बल्कि उन्हें कॉपी भी करते हैं। इसलिए इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।'

जांच की मांग क्यों?
संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह सिर्फ गलती थी या किसी प्रतिबंधित उत्पाद को सामान्य बनाने की कोशिश। उन्होंने कहा, 'यह जानना जरूरी है कि यह जानबूझकर कानून का उल्लंघन था, लापरवाही थी या किसी तरह की पब्लिसिटी का हिस्सा।' संगठन ने यह भी कहा कि अगर पराग की कोई गलत मंशा नहीं थी, तो उन्हें खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और जांच में सहयोग करना चाहिए।

बीसीसीआई से सख्ती की अपील
महिला समूह ने बीसीसीआई से 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि क्रिकेट जैसे बड़े मंच पर इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि साफ संदेश जाए कि कानून और बच्चों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है।
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