भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीसीआई) ने चेतन शर्मा की अगुआई वाली चयन समिति को बर्खास्त कर दिया है। पिछले कुछ टूर्नामेंट में टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन को लेकर यह फैसला लिया गया है। अब बीसीसीआई ने नई चयन समिति के लिए आवेदन भी मंगवाए हैं। साथ ही बोर्ड ने यह भी साफ कह दिया है कि जो भी नई चयन समिति होगी उसे तीनों फॉर्मेट में अपना कप्तान चुनना होगा। इसका मतलब साफ है कि बीसीसीआई अब स्प्लिट कैप्टेंसी की ओर रुख कर रहा है।
बीसीसीआई ने चयनकर्ताओं के लिए आठ "मुख्य कार्य कर्तव्यों/जिम्मेदारियों" को सूचीबद्ध किया है। वे इस प्रकार हैं:
1. निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सर्वश्रेष्ठ टीम का चयन करें।
2. सीनियर मेन्स नेशनल टीम के लिए एक मजबूत बेंच स्ट्रेंथ की योजना बनाएं और तैयार करें।
3. आवश्यकता पड़ने पर टीम मीटिंग में हिस्सा लें।
4. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैच देखने के लिए यात्रा करें।
5. हर तीन महीने पर बीसीसीआई की अपेक्स काउंसिल को टीम के प्रदर्शन की रिपोर्ट भेजें।
6. बीसीसीआई द्वारा निर्देश दिए जाने पर टीम चयन पर मीडिया को संबोधित करें।
7. हर एक फॉर्मेट में टीम के लिए कप्तान नियुक्त करें।
8. बीसीसीआई के नियमों और विनियमों का पालन करें।
नए चयकर्ताओं के रोल के लिए की-नोट; इसके सातवें पॉइंट में नए कप्तान को लेकर बात कही गई है।
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महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
2017 के बाद पहली बार स्प्लिट कैप्टेंसी
अगर ऐसा हुआ तो महेंद्र सिंह धोनी-विराट कोहली के बाद पहली बार स्प्लिट कैप्टेंसी का दौरा आएगा। धोनी ने 2017 की शुरुआत में वनडे-टी20 यानी सिमित ओवर क्रिकेट की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त टेस्ट में कोहली और लिमिटेड ओवर में धोनी टीम इंडिया के कप्तान थे। ऐसा 2014 के दिसंबर से लेकर 2017 तक चला था। धोनी ने 2014 के दिसंबर में टेस्ट से संन्यास ले लिया था। तब भारतीय क्रिकेट में काफी समय बाद स्प्लिट कैप्टेंसी का इस्तेमाल हुआ। 2017 से लेकर 2021 तक विराट कोहली तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान रहे। फिर कोहली के बाद रोहित तीनों फॉर्मेट में कप्तान बने।
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धोनी वनडे-टी20 और कुंबले टेस्ट के कप्तान थे
- फोटो : सोशल मीडिया
2007-08 में भी स्प्लिट कैप्टेंसी का इस्तेमाल हुआ
2014 से पहले यानी 2008 से लेकर टेस्ट की कप्तानी छोड़ने तक धोनी ही तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान रहे थे। 2007 और 2008 में भी ऐसा समय आया था जब स्प्लिट कैप्टेंसी का इस्तेमाल हुआ था। धोनी सिमित ओवर के कप्तान थे और अनिल कुंबले टेस्ट में कप्तानी कर रहे थे। 2008 में कुंबले के संन्यास लेने के बाद कप्तानी का दायित्व पूरी तरह से धोनी को सौंपा गया था। अब फिर से स्प्लिट कैप्टेंसी का इस्तेमाल होने जा रहा है। हार्दिक पांड्या टी20 और रोहित शर्मा को वनडे और टेस्ट में कप्तानी का दायित्व सौंपा जा सकता है।
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हार्दिक पांड्या और रोहित शर्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
रोहित वनडे-टेस्ट में कप्तान बने रह सकते हैं
बीसीसीआई रोहित को वनडे की कप्तानी से 2023 विश्व कप से पहले हटाने का जोखिम नहीं उठाएगा। ऐसे में उन्हें भारत में होने वाले 2023 वनडे विश्व कप तक रोहित ही इस फॉर्मेट में कप्तान बने रह सकते हैं। वहीं, टेस्ट में रोहित ने अब तक अच्छी कप्तानी की है। ऐसे में उन्हें उस फॉर्मेट में भी बतौर कप्तान जारी रखा जा सकता है। वहीं, टी20 में हार्दिक को केएल राहुल और ऋषभ पंत पर तरजीह दी सकती है और कप्तान बनाया जा सकता है।
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हार्दिक और वीवीएस लक्ष्मण
- फोटो : सोशल मीडिया
हार्दिक टी20 में बन सकते हैं नए कप्तान
हार्दिक ने 2021 टी20 विश्व कप में खराब प्रदर्शन के बाद ब्रेक लिया था और फिर आईपीएल में शानदार वापसी की थी। उन्होंने अपनी टीम गुजरात टाइटंस को पहले ही सीजन में चैंपियन बनाया था। इसके अलावा आयरलैंड दौरे पर भी वह युवा टीम की कप्तानी कर चुके हैं। ऐसे में मिशन 2024 टी20 वर्ल्ड कप को देखते हुए हार्दिक को पूरी तरह से अपनी टीम बनाने की छूट दी जा सकती है।