पैराग्लाइडिंग शारीरिक नहीं, मानसिक मजबूती का साहसिक खेल है। चमोली के पीपलकोटी में डा. राघवेंद्र पाठक ने 60 वर्ष की उम्र में पैराग्लाइडिंग से उड़ान भर कर इसे साबित कर दिखाया।
तस्वीरों में देखिए, 60 साल का 'खतरों' का खिलाड़ी
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पिथौरागढ़ के पास देवकिया और पाभै की पहाड़ी से पैराग्लाइडिंग से उड़ान भर रहे डा. पाठक को देखकर लोग हैरान रह गए। शनिवार को भी वह हवा में करीब 45 मिनट तक रहे और करीब 20 किलोमीटर की दूरी उन्होंने पैराग्लाइडर से तय की।
डा. पाठक 1978 से 1983 तक आर्मी मेडिकल कोर में कैप्टन रैंक के डॉक्टर रहे। सेना से अवकाश लेने के बाद उन्होंने चमोली जिले के पीपलकोटी में अपना क्लीनिक खोला। 2006 में जब उनकी उम्र 50 साल की हुई तब उन्होंने पैराग्लाइडर के सहारे हवा में उड़ने का आनंद उठाने की सोची। उन्होंने स्थानीय स्तर पर होने वाले पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण कैंपों में भाग लिया और कुछ दिन में ही वह पैराग्लाइडिंग के सारे गुर सीख गए।
उत्तराखंड पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के सचिव शंकर सिंह डा. पाठक को पिथौरागढ़ ले अए। पिछले तीन दिनों से इन लोगों ने बरखालेक, चहज, देवकटिया, पाभै की पहाड़ियों में पैराग्लाइडिंग से उड़ान भरी। शंकर सिंह ने बताया कि डा. पाठक की चुस्ती, संतुलन और एकाग्रता हैरान करने वाली है।
खास बात यह है कि जब इस उम्र में आदमी आराम करने की सोचता है। उसके कमर, घुटने दुखने लगते हैं, ऐसी उम्र में डा. पाठक हवा में 20 किलोमीटर तक सफल उड़ान भर रहे हैं।