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Avalanche: द्रोपदी के डांडा में ना के बराबर होती है हिमस्खलन की आशंका, निम के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा

Tue, 04 Oct 2022 08:11 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 04 Oct 2022 08:11 PM IST
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Avalanche in Uttarkashi: incident In Draupadi ka Danda peak has happened for the first time in Nim history
द्रोपदी का डांडा ट्रैक - फोटो : अमर उजाला

द्रौपदी का डांडा चोटी(5771 मी.) का आरोहण कर लौट रहा 41 पर्वतारोहियों का दल मंगलवार सुबह हिमस्खलन की चपेट में आया गया। उन्हें निकालने के लिए वायुसेना की मदद ली गई। हादसे में 37 लोग अभी भी लापता हैं जिसमें 34 प्रशिक्षु हैं। 



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निम के इतिहास में ऐसी घटना पहली बार हुई है। कर्नल अजय (सेनि) ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कई बार प्रशिक्षु क्रेवास में गिर जाते हैं लेकिन इन्हें निकाल दिया जाता है। हल्की चोटें आती हैं लेकिन प्रशिक्षण के दौरान कोई बड़ी घटना या फिर जनहानि कभी नहीं हुई है।

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान 14 नवंबर, 1965 को स्थापित किया गया था। यह भारत के प्रमुख पर्वतारोहण संस्थानों में से एक है, जिसने एशियाभर में अपनी पहचान बनाई है।

Avalanche in Uttarkashi: incident In Draupadi ka Danda peak has happened for the first time in Nim history
द्रोपदी का डांडा ट्रैक - फोटो : अमर उजाला

द्रोपदी का डांडा पर्वत को पर्वतारोहण के एडवांस कोर्स के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। यहां एवलांच या अन्य ऐसी घटनाओं की आशंका ना के बराबर रहती है। इसलिए निम पर्वतारोहण के एडवांस कोर्स के लिए इस पर्वत का ही उपयोग करता है। 

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रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल - फोटो : अमर उजाला

द्रोपदी का डांडा पर्वत डोकरानी बामक ग्लेशियर जिस जगह से शुरू होता है वहां से द्रोपदी का डांडा पर्वत की चढ़ाई शुरू होती है। द्रोपदी का डांडा पर्वत की ऊंचाई 5006 मीटर बताई जा रही है। निम के पूर्व प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल (सेनि) ने बताया कि द्रोपदी का डांडा पर्वतारोहण के प्रशिक्षण के लिए सबसे मुफीद माना जाता है।

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उत्तरकाशी में यहीं हुआ एवलांच - फोटो : अमर उजाला

साथ ही यहां एवलांच या अन्य ऐसी घटनाओं की संभावनाएं ना के बराबर रहती है। इसीलिए इस क्षेत्र को पर्वतारोहण के प्रशिक्षण के लिए चयनित किया जाता है।नेहरू पर्वता रोहण संस्थान पर्वतारोहण के लिए बेसिक व एडवांस कोर्स कराता है। जो 28-28 दिन के होते हैं।

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बचाव अभियान के लिए एसडीआरएफ की टीमें रवाना - फोटो : अमर उजाला

बेसिक कोर्स में ए ग्रेड प्राप्त करने वाले प्रशिक्षुओं को एडवांस कोर्स के लिए चयनित किया जाता है। एडवांस कोर्स में ए ग्रेड प्राप्त करने वालों को सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स के लिए चयनित किया जाता है। एडवांस कोर्स के लिए द्रोपदी का डांडा का ही प्रयोग किया जाता है। 

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